CHHATTISGARH : NMC tightens the reins on advertisements of doctors and hospitals
रायपुर, 8 अक्टूबर। डॉक्टरों और अस्पतालों की ओर से किए जाने वाले विज्ञापनों और प्रचार को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसका मकसद भ्रामक चिकित्सा दावों पर रोक लगाना और मरीजों को सही, पारदर्शी और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराना है। नई गाइडलाइन 6 अक्टूबर से प्रभावी है।
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किन चीजों पर लगी रोक?
नई गाइडलाइन के तहत डॉक्टर और अस्पताल इलाज को लेकर 100 प्रतिशत गारंटी, पक्का इलाज, नंबर-1, बेस्ट डॉक्टर या 100% सफलता जैसे ऐसे दावे नहीं कर सकेंगे, जिन्हें प्रमाणित करना संभव न हो। मरीजों के फर्जी या पैसे देकर कराए गए रिव्यू, रेटिंग और टेस्टिमोनियल का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित किया गया है।
डॉक्टर किसी सेलिब्रिटी, मरीज, इन्फ्लुएंसर या अन्य व्यक्ति के जरिए अपनी चिकित्सा सेवाओं का प्रचार भी नहीं करा सकेंगे। सोशल मीडिया, वेबसाइट, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले प्रचार पर भी ये नियम लागू होंगे।
AI से बने प्रचार पर भी नजर
NMC ने AI और डिजिटल तकनीक के जरिए तैयार किए जाने वाले प्रमोशनल कंटेंट को भी गाइडलाइन के दायरे में रखा है। मरीजों की तस्वीर, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल प्रचार के लिए निर्धारित शर्तों के बिना नहीं किया जा सकेगा।
NMC के मुताबिक डॉक्टरों को स्वास्थ्य जागरूकता, सरकारी स्वास्थ्य अभियानों और शैक्षणिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की अनुमति है, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत मरीज जुटाने या अपने व्यवसाय के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। नियमों का उल्लंघन होने पर सुधारात्मक कार्रवाई से लेकर पंजीयन पर रोक या निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।
