MP NEWS: नई दिल्ली। कूनो नेशनल पार्क में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। भारतीय मूल की मादा चीता मुखी ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह पहली बार है जब भारत में जन्मी किसी मादा चीता ने देश की ही धरती पर सफल प्रजनन किया है। कूनो प्रबंधन के अनुसार, मां और सभी शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं।
मुखी: संघर्षों से उठी ‘सुपर मदर’
करीब 33 महीने पहले दक्षिण अफ्रीका से लाई गई एक चीता ने तीन शावकों को जन्म दिया था, जिनमें से दो कठिन परिस्थितियों में जीवित नहीं रह पाए। केवल एक छोटी, कमजोर और अनिश्चित भविष्य वाली मादा शावक बची — वही आगे चलकर मुखी बनी।
कूनो के वनकर्मियों की निगरानी और प्रकृति की कठोर परीक्षा के बीच मुखी ने शिकार करना सीखा, अपनी टेरिटरी बनाई और मौसम, भूगोल व जंगल की चुनौतियों के प्रति अद्भुत अनुकूलन क्षमता दिखाई। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय परिस्थितियों में विकसित यह अनुकूलन ही उसे “पहली सफल भारतीय मूल की प्रजननक्षम चीता” बनाता है।
प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक मोड़
मुखी द्वारा पांच शावकों का जन्म यह साबित करता है कि कूनो का जंगल, आवासीय वातावरण, भोजन-श्रंखला और सुरक्षा व्यवस्था चीतों के लिए स्थायी रूप से अनुकूल हो चुकी है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे किसी भी पुनर्वास परियोजना की सबसे बड़ी सफलता—स्वाभाविक प्रजनन उछाल—बताते हैं।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब आत्मनिर्भर चीता जनसंख्या के अपने लक्ष्य के बेहद करीब है ।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे “भारत के वन्यजीव इतिहास का मील का पत्थर” बताया। वहीं केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक जन्म नहीं, बल्कि पूरी परियोजना का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण क्षण है।
