KHABAR CHALISA SUNDAY SPECIAL तिरछी नजर : अमित कटारिया नहीं झुकेंगे?

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KHABAR CHALISA SUNDAY SPECIAL – A Sideways Glance: Will Amit Kataria not bow down?

 

KHABAR CHALISA SUNDAY SPECIAL तिरछी नजर :  सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के खिलाफ संसद के विशेषाधिकार हनन कमेटी में शिकायत कर चुके हैं। वो अमित कटारिया पर जनहित से जुड़े पत्रों का जवाब नहीं देने और फोन पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया था। चर्चा है कि कटारिया सीएम और सीएस तक वस्तु स्थिति से अवगत करा दिया है।

 

बताते हैं कि कटारिया के पक्ष से सभी संतुष्ट हैं। कुछ लोग सारे विवाद को स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों की दवा-उपकरण सप्लाई से भी जोड़कर देख रहे हैं। सप्लाई तो हो गई, लेकिन ऊंची दर और गुणवत्ता में कमी की वजह से मेडिकल कॉलेजों ने सारी सामग्री लौटा दी है। इस वजह से भुगतान रूक गया है। कटारिया की छवि साफ-सुथरे अफसर की है। उन्होंने साफ तौर कह दिया है कि उनके रहते भुगतान नहीं होगा। बात शीर्ष स्तर तक पहुंची है और विभागीय मंत्री भी कटारिया से सहमत हैं। अब बात निकलेगी, तो दूर तलक जाएगी ही। ऐसे में देखना कि विवाद का निपटारा कैसे होता है।

 

बदलाव के बाद भाजपा में जंग

 

प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के बाद एक अलग तरह की जंग छिड़ गई है। संगठन के दो प्रमुख पदाधिकारी अजय जम्वाल और पवन साय के हटते ही नए पदाधिकारियों के करीब आने के लिए स्थानीय नेताओं में होड़ मच गई है। इसी खींचतान के बीच पिछले दिनों प्रदेश के दो प्रमुख पदाधिकारियों के बीच तीखी तकरार भी हो गई।

चर्चा है कि प्रदेश भाजपा के कई पदाधिकारियों में नए महामंत्री (संगठन) कर्मवीर से नजदीकी बढ़ाने की होड़ लगी है। कुछ नेता तो अपने जिम्मे के काम छोड़कर उनके आगे-पीछे घूम रहे हैं। ऐसे ही एक नेताजी को प्रदेश भाजपा के दूसरे महामंत्री ने जमकर फटकार लगा दी।

दरअसल, नेताजी के पास एक निकाय का प्रभार है, जहां कुछ हफ्तों बाद चुनाव होने हैं। इसके अलावा पार्टी दफ्तर में भी उन्हें कुछ जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। लेकिन नेताजी हैं कि अपने कामकाज पर ध्यान देने के बजाय पूरा समय कर्मवीर के आसपास ही बिताते हैं। कर्मवीर जहां जाते हैं, नेताजी भी उनके आसपास रहने की कोशिश करते हैं। उनकी इस कार्यशैली से नाराज महामंत्री ने उन्हें जमकर सुनाया और अपनी जिम्मेदारियां निभाने की सख्त हिदायत दी। अब नेताजी पर इस फटकार का कितना असर होता है, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।

बीजेपी चुनावी मोड में

 

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की आहट क्या हुई, बीजेपी ने सोशल मीडिया के मोर्चे पर ही अपनी फौज उतार दी। निकायवार प्रभारियों की नियुक्ति भी हो गई। यानी चुनाव की तारीख आए या न आए, पोस्ट और प्रचार की तैयारी पहले से पक्की। बीजेपी को चुनावी प्रबंधन में माहिर यूं ही नहीं कहा जाता। उधर कांग्रेस की तैयारियां फिलहाल नजरों से ओझल है। अब यह शांति किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है या तैयारी शुरू होने का इंतजार, यह तो कांग्रेसी ही बता सकते हैं। प्रदेश के चार नगर निगम समेत दूसरे निकायों के चुनाव होने हैं। इसे विधानसभा चुनाव का रिहर्सल भी कह सकते हैं और सरकार के कामकाज की परीक्षा भी। ऐसे में बीजेपी ने तो कॉपी-पेन निकाल लिया है, लेकिन लगता है कांग्रेस अभी परीक्षा की तारीख का इंतजार कर रही है।

 

 

भीड़ आई, सुर्खियां कहां गईं

 

काकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर देशभर में प्रदर्शन का ऐलान किया। इसी कड़ी में बिलासपुर में भी मोर्चा खुला। आयोजकों के अनुमान से ज्यादा भीड़ जुट गई। अब इतनी मेहनत के बाद उम्मीद तो यही रही होगी कि अगले दिन अखबारों में प्रदर्शन की धूम रहेगी। लेकिन हुआ उलटा। भीड़ ने हाजिरी तो अच्छी लगाई, मगर खबर को वैसी सुर्खियां नहीं मिलीं। अब इसे प्रचार की कमी कहें, खबर की किस्मत या फिर भीड़ जुटाना और सुर्खियां बटोरना दो अलग-अलग हुनर है। यह बात बिलासपुर के प्रदर्शन ने जरूर समझा दी। आखिर राजनीति में सिर्फ भीड़ से काम नहीं चलता, भीड़ की खबर बनना भी जरूरी है।

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