PRIVATE SPACE SECTOR : Ruckus over privatization of ISRO!
रायपुर। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती एंट्री को लेकर अब ISRO के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं। ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और ISRO चीफ डॉ. वी. नारायणन को पत्र लिखकर निजीकरण की दिशा पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
किन 9 प्रमुख कर्मचारी संघों ने उठाए सवाल?
इसरो स्टाफ एसोसिएशन (ISRO Staff Association)
शार एम्प्लॉइज एसोसिएशन (SHAR Employees Association, श्रीहरिकोटा)
इसैक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (ISAC Employees Association, बेंगलुरु)
इसरो स्टाफ एसोसिएशन-एलपीएससी (LPSC, तिरुवनंतपुरम)
इसरो स्टाफ एसोसिएशन-बीबीयू (BBU)
एनआरएसए एम्प्लॉइज यूनियन (NRSA)
स्पेस एम्प्लॉइज एसोसिएशन-बीबीयू
इसरो स्टाफ एसोसिएशन-आईपीआरसी (IPRC, महेंद्रगिरि)
सैक एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (SAC, अहमदाबाद)
कर्मचारी संगठनों ने पूछा है कि आखिर भविष्य में ISRO की भूमिका क्या होगी? क्या PSLV, LVM3 और SSLV जैसे बड़े लॉन्च व्हीकल्स के निर्माण और लॉन्चिंग का काम भी निजी कंपनियों को सौंप दिया जाएगा?
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कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने को लेकर लगातार बयान सामने आ रहे हैं, लेकिन ISRO कर्मचारियों को अब तक सरकार या अंतरिक्ष विभाग की तरफ से कोई स्पष्ट नीति नहीं बताई गई है।
पत्र में इन-स्पेस के अध्यक्ष पवन गोयनका के उस बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में ISRO किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा। कर्मचारी संगठनों ने पूछा है कि क्या यह भारत सरकार की आधिकारिक नीति है?
वहीं ISRO चीफ डॉ. वी. नारायणन ने निजी क्षेत्र की भागीदारी का बचाव करते हुए कहा कि भारत की स्पेस इकोनॉमी को तेजी से बढ़ाना जरूरी है और ISRO अकेले देश की भविष्य की जरूरतें पूरी नहीं कर सकता। देश को आने वाले समय में सैकड़ों सैटेलाइट की जरूरत होगी, इसलिए निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका के बीच ISRO का भविष्य और उसके हजारों कर्मचारियों की भूमिका क्या होगी? अब कर्मचारी संगठनों ने सरकार से इसी पर लिखित जवाब मांगा है।
