India’s growing economic divide: Top 10% hold 58% of income, women only 15.7% – World Inequality Report 2026
दैनिक छत्तीसगढ़ वॉच | बिज़नेस डेस्क
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था भले ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है, लेकिन वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2026 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि इस विकास का बड़ा फायदा केवल समाज के एक छोटे से हिस्से तक ही पहुँच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक तरक्की के बीच असमानता की खाई पहले जितनी ही चौड़ी बनी हुई है—जहां अमीर और अमीर हो रहे हैं, वहीं गरीबों की आमदनी में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में शामिल है। देश की कुल आय का 58% हिस्सा सिर्फ शीर्ष 10% लोगों के पास है, जबकि निचले 50% लोगों को केवल 15% आय मिलती है। यह अंतर पिछले कई वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है।
भारत की औसत वार्षिक आय 6,224 यूरो (PPP) यानी प्रति माह करीब 518 यूरो बताई गई है। औसत संपत्ति 28,141 यूरो है, जो वैश्विक स्तर पर काफी कम मानी जाती है।
संपत्ति के मामले में असमानता और ज्यादा साफ दिखाई देती है—देश की कुल संपत्ति का 65% सिर्फ टॉप 10% के पास है और 40% संपत्ति अकेले शीर्ष 1% लोगों के हाथों में है। निचले 50% के पास संपत्ति का केवल 6.4% हिस्सा है।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। महिलाओं की श्रम आय हिस्सेदारी सिर्फ 15.7% है—और पिछले 10 सालों में इसमें कोई बदलाव नहीं आया।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 1980 के मुकाबले आज भारत की बड़ी आबादी वैश्विक आय वितरण के निचले हिस्से में आ चुकी है, यानी भारत का आम नागरिक वैश्विक स्तर पर कम आय वाले वर्ग में गिना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर प्रणाली में सुधार, सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना, और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना असमानता को कम करने के लिए जरूरी कदम हैं।

