आपके एफडी में लगे पैसों पर क्या असर डालेगी RBI की क्रेडिट पॉलिसी, अब क्या होगा म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों का?

Date:

नई दिल्ली : ओमीक्रॉन के संकट को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नही किया है. लेकिन यह तय है कि सस्ती ब्याज दरों का दौर अब बहुत लंबा चलने वाला नहीं है. हाल में बैंकों की ओर से एफडी पर बढ़ाई गई ब्याज दरें इस बात का संकेत हैं. साथ ही महंगाई का बढ़ना भी एक चुनौती है.

महंगाई बजट बिगाड़ने के साथ साथ उनके के लिए भी चिंता का सबब है जो बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे विकल्पों में निवेश करते हैं. हालंकि महंगाई बढ़ना और नीतिगत दरों में कोई बदलाव न होना निवेशकों पर दोहरी चोट है. नीतिगत दरों में बढ़ोतरी से ही जमा पर ब्याज दरें सुधरने का रास्ता खुलता है.

महंगाई बढ़ने की ही तरह निवेशकों के लिए एक और चिंता का विषय बॉण्ड यील्ड का बढ़ना भी है. सरकार के दस साल के बॉण्ड की यील्ड को देश में ब्याज दरों का बेंचमार्क माना जाता है. बीते एक साल में बॉण्ड यील्ड 5.89 फीसदी से बढ़कर 6.37 फीसदी पर पहुंच गई है. बॉण्ड यील्ड यानी निवेशकों को बॉण्ड में निवेश करने पर किस दर से ब्याज मिलेगा. जब बॉण्ड की कीमतें बढ़ती हैं यील्ड घटती और इसका उलट जब बॉण्ड की कीमत घटती है तो यील्ड बढ़ती है.

बॉण्ड यील्ड के बढ़ने पर डेट म्यूचुअल फंड को नुक्सान होता है, क्योंकि उनकी होल्डिंग बॉण्ड की कीमत के आधार पर तय होती है. यही कारण है कि बॉण्ड यील्ड बढ़ने पर डेट म्यूचुअल फंड के रिटर्नस पर बुरा असर पड़ता है.

तो फिर क्या करें म्यूचुअल फंड निवेशक?
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी से मध्यम अवधि के लिए डेट म्यूचुअल फंड में निवेश करना कम जोखिम भरा है. क्वांटम म्यूचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम फंड मैनेजर पंकज पाठक कहते हैं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी लंबी अवधि के बॉण्ड्स के लिए नकारात्मक है क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने से बॉण्ड की कीमतें और गिरेंगी. निवेशकों को इस समय ऐसे डेट फंड्स में निवेश करना चाहिए जो छोटी अवधि के डेट विकल्पों में निवेश करें. क्योंकि ये ब्याज दरों से कम प्रभावित होते हैं.

बैंक में एफडी वाले अब क्या करें?
अगर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होता है तो निवेशकों को ऐसे विकल्प चुनने चाहिए जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सके. हालांकि उनमें जोखिम का भी ख्याल रखना होगा. RSM इंडिया के संस्थापक सुरेश सुराना कहते हैं, निवेशकों को ऐसे विकल्पों को चुनना चाहिए जहां रिटर्न महंगाई की दर से ज्यादा हो. ऐसे में इक्विटी आधारित उत्पाद ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकते हैं. एफडी का विकल्प छोटी अवधि के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

#Crime Updates

More like this
Related