CHHATTISGARH : छत्तीसगढ़ में फाइव डे वीक बना सिस्टम पर बोझ, सरकार कर सकती है पुनर्विचार

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CHHATTISGARH : Five day week has become a burden on the system in Chhattisgarh, government may reconsider

रायपुर। CHHATTISGARH छत्तीसगढ़ में लागू ‘फाइव डे वीक’ व्यवस्था अब सरकारी कामकाज पर भारी पड़ रही है। सप्ताह में सिर्फ पांच दिन ऑफिस खुलने और राष्ट्रीय व प्रादेशिक छुट्टियों की भरमार से सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप हो जाता है। हालत ये है कि अफसर तो दूर, कर्मचारी और बाबू भी समय पर दफ्तर नहीं पहुंचते। आम जनता ऑफिसों के चक्कर लगाते-लगाते थक रही है, लेकिन फाइलें जस की तस पड़ी रहती हैं।

CHHATTISGARH बीते हफ्ते 10 और 11 मई को शनिवार और रविवार की छुट्टी रही, फिर सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी पड़ गई। इस तरह लगातार तीन दिन दफ्तर बंद रहे। अप्रैल में भी सिर्फ 11 कार्यदिवसों में से 7 दिन छुट्टी रही। इसमें महावीर जयंती, आंबेडकर जयंती, गुड फ्राइडे और दो-दो वीकेंड शामिल थे। ऊपर से लोकल त्योहारों पर भी पूरे दिन की छुट्टियां दे दी जाती हैं।

सरकारी व्यवस्था चरमराई

CHHATTISGARH पिछली सरकार ने कर्मचारियों को खुश करने के लिए फाइव डे वीक तो लागू किया, लेकिन टाईमिंग और अनुशासन लागू करने में कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। अधिकारी-कर्मचारी मनमाने समय पर ऑफिस आते-जाते रहे। बायोमेट्रिक उपस्थिति की बात होते ही उसे “सम्मान” का मुद्दा बना लिया जाता है।

फाइव डे वीक का आदेश हो सकता है निरस्त

दिसंबर 2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि नई सरकार फाइव डे वीक व्यवस्था को खत्म कर सकती है। अब इस विषय पर अधिकारिक स्तर पर भी गंभीर मंथन शुरू हो गया है। संभावना है कि केंद्र की तर्ज पर दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी और अन्य दिन सामान्य कार्यदिवस की व्यवस्था फिर से लागू की जाए।

केंद्र का मॉडल अधूरा अपनाया

CHHATTISGARH राज्य सरकार ने केंद्र की तर्ज पर फाइव डे वीक तो लागू किया, लेकिन उसकी कार्य संस्कृति को नहीं अपनाया। केंद्र सरकार के कार्यालयों में कर्मचारी सुबह 9 बजे से 5 बजे तक बायोमेट्रिक उपस्थिति के साथ काम करते हैं। जबकि राज्य के अधिकांश दफ्तरों में समय का पालन नहीं होता।

सरकार को नहीं मिला सियासी लाभ

CHHATTISGARH पिछली भूपेश बघेल सरकार ने पौने चार लाख कर्मचारियों को अधिक छुट्टियों का तोहफा दिया, लेकिन इसका चुनावी लाभ नहीं मिला। कांग्रेस को इससे फायदा नहीं हुआ और बीजेपी ने और अधिक सीटों के साथ सरकार बना ली। यानी कर्मचारी परिवार भी इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं दिखे।

 

 

 

 

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