BILASPUR RAIN: City submerged after just 4 hours of rain; Municipal Corporation’s shortcomings exposed once again!
BILASPUR RAIN: शहर में सोमवार को हुई महज 4 घंटे की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के दावों को एक बार फिर पूरी तरह से धोकर रख दिया है। करोड़ों रुपये के प्री-मानसून नाला सफाई अभियान की पोल झमाझम बारिश में खुल गई। सड़कों पर सैलाब और निचली बस्तियों में घुसे पानी ने शहरवासियों को 17 जुलाई को हुई उस खौफनाक बारिश की याद दिला दी, जब पूरा शहर डूब गया था। स्थिति यह है कि शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर निचली बस्तियों तक, पूरा बिलासपुर जलमग्न हो गया है। स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले निगम प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
बारिश थमने के बाद भी कई घंटों तक शहर की प्रमुख सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा रहा, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। अब जनता की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है- आखिर थोड़ी सी बारिश में होने वाले इस जलभराव से बिलासपुर को कब निजात मिलेगी?
लौट आया 17 जुलाई का खौफ, प्रमुख क्षेत्रों का हाल बेहाल
चंद घंटों की बारिश में शहर के प्रमुख इलाके तालाब में तब्दील हो गए। लिंक रोड, मगरपारा, गांधी चौक, व्यापार विहार और बस स्टैंड के आस-पास जलभराव के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे बुरा हाल निचली बस्तियों का रहा, जहां नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों के भीतर तक घुस गया। हालात देखकर लोगों के दिलों में फिर वही 17 जुलाई की दहशत बैठ गई कि कहीं उनका कीमती सामान फिर से पानी की भेंट न चढ़ जाए। रहवासियों को रात-जगा कर अपने घरों से पानी बाहर निकालना पड़ा।
जाम में फंसे लोग, गाड़ियां हुईं बंद
जलभराव के कारण शाम के वक्त शहर के लगभग सभी प्रमुख मार्गों पर भयंकर ट्रैफिक जाम लग गया। दफ्तर से घर लौट रहे लोग घंटों जाम में फंसे रहे। जलमग्न सड़कों से गुजरने के प्रयास में दर्जनों दोपहिया और चार पहिया वाहन बीच रास्ते में ही बंद हो गए, जिन्हें लोग धक्का मारते नजर आए।
कागजों पर ही हुई नालों की सफाई!
नगर निगम ने मानसून आने से पहले शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई के लिए लाखों-करोड़ों का टेंडर जारी किया था। निगम अधिकारियों ने दावा किया था कि इस बार जलभराव की स्थिति नहीं बनेगी। लेकिन 4 घंटे की बारिश ने साबित कर दिया कि 17 जुलाई की त्रासदी के बाद भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया और सफाई का काम सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित रहा। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी सड़कों पर बहने लगा।
जनता में भारी आक्रोश
स्थानीय नागरिकों में नगर निगम के प्रति भारी आक्रोश है। मगरपारा के एक रहवासी ने बताया, “हर साल बारिश से पहले निगम बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहता है। 17 जुलाई को भी यही हुआ था और आज भी जरा सी बारिश में घरों में पानी घुस गया है, कोई अधिकारी सुध लेने नहीं आता।”
खबर चालीसा के तीखे सवाल, जो निगम प्रशासन से पूछे जाने चाहिए:
• 17 जुलाई की बारिश के बाद भी प्रशासन ने ड्रेनेज सुधारने के लिए क्या कदम उठाए?
• प्री-मानसून नाला सफाई के नाम पर खर्च किए गए लाखों रुपये कहां गए?
• हर साल जलभराव की समस्या होने के बावजूद स्थायी जल निकासी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
नींद में सोया निगम प्रशासन आखिर कब जागेगा और जनता के हुए नुकसान की जवाबदेही किसकी होगी?
