CG LIQUOR SCAM : High Court strict in liquor scam!
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच के बीच बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने रायपुर की 13.5 एकड़ व्यावसायिक संपत्ति से खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले प्रतिबंध हटाना पूरे मामले की पड़ताल को प्रभावित कर सकता है।
जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने आधुनिक ट्रांसपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन लिमिटेड की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल यथास्थिति बनाए रखना ही न्यायहित में है। अदालत ने माना कि जांच एजेंसियों को यह पता लगाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए कि संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल हुआ धन कहां से आया और उसका कथित शराब घोटाले से कोई संबंध है या नहीं।
कंपनी का कहना था कि रायपुर के रिंग रोड-1 स्थित जमीन और भवन उसकी वैध संपत्ति हैं और वह किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं है। कंपनी ने अदालत को बताया कि वर्ष 2022 में ऐश्वर्या एग्री रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ एमओयू बाद में निरस्त कर दिया गया था, फिर भी संपत्ति पर रोक लगाए जाने से उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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वहीं आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अदालत में दावा किया कि यह संपत्ति कथित आबकारी घोटाले से अर्जित अवैध धन से जुड़ी हो सकती है। जांच एजेंसी के मुताबिक, घोटाले से जुड़े लोगों ने सिंडिकेट के जरिए कमाई गई रकम से कई संपत्तियां खरीदीं, जिनमें कुछ बेनामी भी बताई जा रही हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल इस आधार पर कि कंपनी अभी आरोपी नहीं है, संपत्ति को जांच के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि संपत्ति किसी तीसरे पक्ष को बेच दी गई तो भविष्य में उसे वापस हासिल करना और जांच को आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश के आदेश को सही ठहराते हुए जांच पूरी होने तक संपत्ति पर रोक बरकरार रखने का फैसला सुनाया। इसे शराब घोटाले की जांच में जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत और अहम कानूनी जीत माना जा रहा है।
