BREAKING : झांसी। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग में फैले भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कार्रवाई करते हुए डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, दो कर अधीक्षक, एक अधिवक्ता और एक निजी फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि जीएसटी चोरी के एक मामले में निजी फर्म को राहत दिलाने के बदले करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारी
सीबीआई के अनुसार, रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 70 लाख रुपये लेते समय कर अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय शर्मा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई मंगलवार देर रात झांसी में योजनाबद्ध तरीके से की गई। जांच में सामने आया कि दोनों अधिकारी यह रकम डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के निर्देश पर वसूल रहे थे।
घर से नकदी और जेवर बरामद
बीते बुधवार सुबह सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को भी हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की। उनके आवास की तलाशी के दौरान करीब 90 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और लगभग 1.60 करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवर भी जब्त किए गए हैं। जांच में एक निजी फर्म के मालिक और एक अधिवक्ता की संलिप्तता भी सामने आई है, जो कथित तौर पर रिश्वत सौदे की बातचीत और लेन-देन में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी CBI
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, यह रकम उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जानी थी, जिससे मामले में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार नेटवर्क होने की आशंका है। एजेंसी अब इस पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने और अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच में जुट गई है।

