छत्तीसगढ़ के 9 जेलर जांच के दायरे में… लाखों की गड़बड़ी का आरोप…

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छत्तीसगढ़ के विभिन्न जेलों में पदस्थ रहे नौ जेलर बंदी पारिश्रमिक में पीड़ित पक्ष को प्रदान की जाने वाली राशि में गड़बड़ी के चलते जांच के दायरे में लिए गए हैं। जिन जेलरों के खिलाफ जांच चल रही हैं उनमें जशपुर जेल के तत्कालीन सहायक जेल अधीक्षक रमाशंकर सिंह , उप जेल अधीक्षक उत्तम पटेल रायगढ़ जेल के जीएस शोरी एसके मिश्रा जांजगीर के एसएस जांगड़े महासमुंद के डीडी टोण्डर एसके साहू कोरबा के केएल देशमुख और बेमेतरा के एसपी कुर्रे हैं।

जांच में पता चला है कि जशपुर जेल के रमाशंकर सिंह ने 23 लाख 84 हजार दो रुपए का गड़बड़ी किया है। इस तरह इसी जेल के उत्तम कुमार ने 7 लाख 75 हजार 815 की गड़बड़ी की। जेल विभाग ने जेल अधीक्षक जीएस शोरी के खिलाफ जांच में पाया कि उन्होंने 18 लाख 20 हजार 328 रुपए का हेर-फेर किया है। जेल अधीक्षक एसके मिश्रा पर 4 लाख 37 हजार 78 रुपए, एसएल जांगड़े पर 38 लाख 77 हजार 113 रुपए, डीडी टोण्डर पर 10 लाख 65 हजार 235, एसके साहू पर 4 लाख 65 हजार 313, केएल देशमुख 6 लाख 22 हजार 750 एवं सहायक जेल अधीक्षक एसपी कुर्रे पर 16 लाख 90 हजार 781 रुपए के हेरफेर का आरोप है।

उल्लेखनीय हैं कि जेल में सजा काटने वाले तमाम बंदियों को शासन के नियम के अनुसार प्रतिदिन एक निश्चित पारिश्रमिक प्रदान किया जाता है। वर्तमान में कुशल बंदी को 70 रुपए और अकुशल बंदी को 60 रुपए का भुगतान होता है। यह राशि बंदियों को एक साथ मिलती हैं, लेकिन इस राशि का एक बड़ा हिस्सा उस पीड़ित पक्ष को दिया जाता है जो बंदी के अपराध से प्रभावित होता है।

अर्थात बंदी अगर हत्या के जुर्म में सजा काट रहा है तो उसके पारिश्रमिक का आधा हिस्सा पीड़ित के परिवार को प्रदान किया जाता है। पीड़ित को प्रदान की जाने वाली राशि में किसी तरह की अनियमितता न हो इसके लिए जेल विभाग की तरफ से कुछ नियम भी बनाए गए हैं। पीड़ित को दी जाने वाली राशि का भुगतान चेक के जरिए ही किया जाता है। पीड़ित पक्ष को राशि सही ढंग से पहुंचे इसके लिए जेल विभाग बकायदा थाने को लिखित पत्र के जरिए सूचना भी देता है।

इन जेलरों में से उत्तम कुमार पटेल के खिलाफ एक पीड़ित ने एफआईआर भी दर्ज करवाई है। फिलहाल उत्तम कुमार जमानत पर है। जेल विभाग ने जांच में दोषी पाए गए सभी जेलरों को नोटिस जारी कर पीड़ित पक्ष को प्रदान की जाने वाली राशि को जमा करने के लिए कहा है। खबर हैं कि उत्तम पटेल और रमाशंकर सिंह ने अपनी गलती मानते हुए घोटाले की राशि जेल विभाग के पास जमा भी कर दी है।

जेल विभाग के सूत्रों का कहना है कि संबंधित जेलरों के द्वारा राशि जमा कर दिए जाने के बाद भी विभागीय जांच चलती रहेगी। जेलरों में एक केएल देशमुख का कोरोना काल में निधन हो चुका है। देशमुख की फाइल बंद होगी या जांच चलती रहेगी यह फिलहाल साफ नहीं है। विभाग इन मामलों को लेकर फूंक फूंक कर कदम रख रहा हैं।

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