NARENDRA MODI : What would you have done if you hadn’t become PM Modi? You’ll be shocked to hear the story!
रायपुर। आज नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर मोदी राजनीति में नहीं आते तो उनका रास्ता क्या होता?
उनकी जिंदगी की शुरुआती कहानी में ऐसे कई मोड़ हैं, जो आज की राजनीतिक पहचान से बिल्कुल अलग नजर आते हैं।
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। PMO की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, उनका बचपन वडनगर में बीता और परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी।
लेकिन युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उनके मन में कुछ और करने की इच्छा थी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मोदी बचपन में भारतीय सेना में जाना चाहते थे। स्कूल के दिनों में उन्हें बहस और पुस्तकालय में समय बिताने में भी रुचि थी।
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इसके बाद उनके जीवन में आध्यात्मिक झुकाव का दौर भी आया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने रामकृष्ण मिशन से जुड़ने पर विचार किया और युवावस्था में इससे जुड़े आश्रमों तक पहुंचे। हालांकि यह रास्ता आगे उनकी स्थायी दिशा नहीं बना।
आखिरकार उनका रास्ता संगठन की ओर मुड़ा। RSS से जुड़ाव के बाद उन्होंने लंबे समय तक संगठनात्मक काम किया और यही सफर आगे उन्हें गुजरात की राजनीति तक ले गया।
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके करीब 13 साल बाद 26 मई 2014 को उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2024 में उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
यानी आज जिस शख्स को देश प्रधानमंत्री के रूप में जानता है, उसकी कहानी की शुरुआत राजनीति से नहीं हुई थी। सेना, आध्यात्मिक जीवन और संगठन इन रास्तों से गुजरते हुए उनका सफर राजनीति तक पहुंचा।
तो सवाल यही है, अगर उस दौर में मोदी ने राजनीति का रास्ता नहीं चुना होता, तो आज उनकी पहचान किस रूप में होती?
