LPG Shortage Impact: एक और संकट की दस्‍तक, LPG किल्‍लत ने बिगाड़ा दूध का गणित

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Impact of LPG Shortage: Another Crisis Looms—LPG Scarcity Disrupts the Economics of Milk Production

LPG Shortage Impact: पश्चिम एशिया में जारी घमासान हर द‍िन भारत की टेंशन बढ़ाता जा रहा है। देशभर में LPG की किल्‍तत के बीच एक और संकट की दस्‍तक सुनाई देने लगी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से देश में गैस और तेल की स्थिति बिगड़ती जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब इसका प्रभाव आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों, खासकर रसोई गैस और दूध की उपलब्धता पर भी पड़ने लगा है।

मिडिल ईस्ट के कई देश दुनिया में तेल और गैस के बड़े सप्लायर हैं। लेकिन युद्ध के चलते वहां उत्पादन और सप्लाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर रोक लगाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में बड़ी बाधा आई है। यह रास्ता दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई के लिए अहम माना जाता है। भारत की बात करें तो देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का करीब 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत हिस्सा बाहर से आता है। ऐसे में सप्लाई रुकने का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।गैस की कमी के कारण कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। लोगों को गैस लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। हालात को संभालने के लिए सरकार को नियमों में बदलाव करने पड़े हैं। आपूर्ति बाधित होने के कारण देश को अपने रिजर्व स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे भविष्य को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

डेयरी सेक्टर पर बढ़ता दबाव

गैस संकट का असर अब डेयरी उद्योग पर भी पड़ने लगा है। दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक तय तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसे पाश्चुरीकरण कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में एलपीजी की जरूरत होती है। इसके अलावा दूध की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और कार्टन बनाने में भी गैस का उपयोग होता है। गैस की कमी के चलते यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे दूध की सप्लाई पर खतरा मंडराने लगा है।डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर गैस की समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई बाधित हो सकती है। कई कंपनियों के पास पैकेजिंग सामग्री का सीमित स्टॉक बचा है, जो कुछ ही दिनों तक चल सकता है। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां डेयरी सेक्टर पहले से दबाव में है। यदि हालात नहीं सुधरे तो बाजार में पैक्ड दूध की कमी देखने को मिल सकती है।

संकट की जड़ क्या है?

दरअसल, भारत बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात पर निर्भर है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद जब होर्मुज मार्ग बाधित हुआ, तो भारत के लिए तेल और गैस की सप्लाई मुश्किल हो गई। इस मार्ग से भारत के करीब 50 से 55 प्रतिशत ऊर्जा संसाधन गुजरते हैं। हालांकि, सरकार वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही है और फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं। कुछ जहाज भारत पहुंच चुके हैं, जबकि बाकी को भी जल्द लाने की कोशिश की जा रही है।

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