CHHATTISGARH : Case against judges… High Court strict
रायपुर। Chhattisgarh High Court की डिवीजन बेंच ने पूर्व चीफ जस्टिस, एक मौजूदा हाई कोर्ट जस्टिस और कई न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया है।
चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस B. D. Guru की बेंच ने साफ कहा कि केवल शक या आशंका के आधार पर न्यायपालिका के लोगों पर आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता।
कोर्ट ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपराधिक कानून को किसी को परेशान करने या दबाव बनाने का हथियार नहीं बनने दिया जा सकता। अगर केवल आरोप या अंदेशे के आधार पर जजों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को आपराधिक मुकदमे में घसीटा जाएगा तो इससे न्यायिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होगी।
दरअसल मामला 2015 की एक घटना से जुड़ा था, जिसमें एक टोल प्लाजा पर शिकायतकर्ता के पति के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया था। उस समय उनके पति सुकमा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने एफआईआर के बावजूद आरोप पत्र इसलिए दाखिल नहीं किया क्योंकि इसमें पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और तत्कालीन चीफ जस्टिस समेत कई लोगों की कथित साजिश थी।
लेकिन हाई कोर्ट ने जांच में पाया कि साजिश से जुड़ा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत साजिश साबित करने के लिए ठोस तथ्य और स्पष्ट सहमति दिखाना जरूरी होता है, जो इस मामले में बिल्कुल नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता के पति के ट्रांसफर, वेतन वृद्धि रोकने या सेवा संबंधी विवाद जैसे मुद्दे सेवा कानून के दायरे में आते हैं, इन्हें आपराधिक साजिश का मामला नहीं बनाया जा सकता। इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने पूरी शिकायत को रद्द कर दिया।

