KHABAR CHALISA SUNDAY SPECIAL तिरछी नजर : नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की स्क्रिप्ट…

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छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी नितिन नबीन के राष्ट्रीय बनने से यहां प्रदेश भाजपा में जश्न का माहौल है।

चर्चा है कि छत्तीसगढ़ के प्रभारी नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की स्क्रिप्ट केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 12 दिसंबर को छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान ही तैयार हो गई थी। शाह की यहां बंद कमरे में नबीन के साथ बैठक भी हुई थी।
दोनों के बीच चर्चा का लब्बोलुआब यह रहा कि बैठक के बाद नबीन ने एक-दो लोगों को संकेत दे दिए थे कि वो दिल्ली में काम करेंगे। तब उनके राष्ट्रीय महासचिव बनने की अटकलें लगाई जा रही थी। अब वो कार्यकारी अध्यक्ष बने हैं, तो बिहार से ज्यादा पार्टी में खुशी देखने को मिल रही है।अब तक छत्तीसगढ़ के दो दर्जन नेता नबीन से मिलकर आ चुके हैं।

दूसरी तरफ, नबीन के साथ डिप्टी सीएम विजय शर्मा का राजनीतिक कद बढ़ने के संकेत हैं।

क्रिकेट मैच और शिकायत

छत्तीसगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन के कर्ता-धर्ता पप्पू भाटिया और उनके पुत्र प्रभजोत भाजपा नेताओं के निशाने पर हैं। खबर है कि पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भाटिया के बीयर कारोबार की जांच की मांग है।

भाटिया की कांग्रेस और भाजपा नेताओं से घनिष्ठता है। मगर इस बार भारत-दक्षिण अफ्रीका मैच में टिकट को लेकर जो मारा मारी हुई, उससे कई भाजपा नेता भन्नाए हुए हैं।

यह चर्चा है कि आबकारी विभाग के कई अफसरों को महंगी टिकट दी गई थी। जबकि प्रभावशाली भाजपा नेता का उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया था।प्रभोतेज बीसीसीआई के पदाधिकारी भी हैं। जनवरी में फिर रायपुर में क्रिकेट मैच होगा, उससे पहले ही भाटिया के खिलाफ शिकायतें हो रही है।

सीएस की सख्ती, टाइम पर आने लगे अफसर

केन्द्र से प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद आए अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज के तरीके बदलने कई उपाय कर रहे है। मंत्रालय में आईएएस अधिकारियों का आने का समय 10 बजे है। मंत्रालय के प्रवेश द्वार में पौने 10 बजे से बड़े-बड़े अधिकारियों की गाड़ी आने लगती है और सवा 10 बजे तक लगभग अधिकारी पहुंच रहे है। थम्ब मशीन में एंट्री करने भीड़ लग जाती है। द्वितीय और तृतीय श्रेणी के अधिकारियों की गाड़ियां पार्किग करने की जगह नहीं मिल रही है। दूर गाड़ी रखकर भागते हुए समय पर पहुंचने की कोशिश हो रही है। एनआईसी की रिकार्ड के अनुसार 95 प्रतिशत तक अधिकारी-कर्मचारी समय पर पहुंच जा रहे है। यह पहले महीने की स्थिति है। अगले वर्ष जनवरी से पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी पूरी हो गई है, इससे पहले बड़े-बड़े अधिकारी दोपहर 2 बजे तक मंत्रालय पहुंच रहे थे या रायपुर में ही एक और विभाग का चार्ज लेकर काम करने के इच्छुक रहते थे। नये साहब के आने से बदलाहट की आहट आ रही है।

हर फाइल पर कैमरे की नजर

मंत्रालय समय पर पहुंचने वाले अधिकारियों के हर फाइल नजर रखने के लिये सिस्टम बना लिया गया है इस सिस्टम में मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर हर विभाग के फाइलों पर नजर रहेगी। ई फाइलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद हर अधिकारी के पास क्या काम है। फाइल कितने घंटे, कितने मिनट रूकी रही इसकी जानकारी चीफ सेक्रेटरी लेकर सेके्रटरी तक रहेगी। इसकी समीक्षा भी इसी माह शुरू हो रही है। अधिकारी ने फाइल क्यों रूकी, इसका जवाब सवाल होगा। जिन अधिकारियों ने अपने कामकाज अच्छे तरीके से किया है उन 10 कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की भी योजना है। इसकी शुरूआत इसी माह से शुरू हो जायेगा ताकि इसका असर अगले माह जनवरी में शुरू होने वाली व्यवस्था पर पड़े। केन्द्र सरकार के तर्ज पर ई फाइलिंग शुरू करने के बाद अपर मुख्य सचिव से लेकर तमाम जिम्मेदार अधिकारी ही सीधे फाइल निपटा रहे है। उन्हें ही फाइल की वास्तविक स्थिति की जानकारी रहती है। पहले पीए या स्टाफ अफसर अथवा बाबू से जानकारी लेने वालो को निराशा हाथ लगेगी। ई-फाइलिंग को मंत्रालय में खत्म करने की मांग उठ रही है। मंत्रालय में ऐसे लोगों का दाना-पानी भी बंद हो गया है। अब सब आगामी कुछ माह में जिलों में देखने को मिल सकता है।

कलेक्टर नियुक्ति में किसकी चली

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के धरना प्रदर्शन के बाद कोरबा कलेक्टर अजीत बसंत को हटा तो दिया गया लेकिन सरगुजा जिला के कलेक्टर बनाने में खेल होने की खबर है। कोरबा कलेक्टर को प्रदेश में पॉवरफुल अफसर माना जाता है। इस अफसर के खिलाफ सैकड़ों शिकायत होने के बावजूद भी क्यों महत्वपूर्ण जिला दिया गया इसके मायने तलाशे जा रहे है। बताया जाता है कि प्रशासन के प्रभावशाली एक गुट ने अपना प्रभाव दिखाते हुए सरगुजा कलेक्टर के लिये अजीत बसंत का नाम प्रमुखता से रखा। कमजोर माने जाने वाले गुट के इन अधिकारियों की तबादले में चलने की खबर है।

विधायक विश्राम गृह बनेगा

छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र नया रायपुर स्थित नये भवन में चला गया है। अब पुराने भवन का क्या उपयोग इस पर विचार विमर्श जारी है। केन्द्र सरकार के तीन विभागों ने पुराने विधानसभा भवन में अपने कार्यालय अथवा प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ करने में रूचि दिखाई है। अलबत्ता राज्य सरकार ने नवाचार करने में पीछे है जबकि भवन पर निर्णय राज्य सरकार को लेना है। नये विधानसभा भवन के पास अत्याधुनिक विधायक विश्राम गृह बनाने का भी टेंडर हो गया है। मध्यप्रदेश की तर्ज पर विधायकों का विश्राम गृह छत्तीसगढ़ में भी बन सकता है। मध्यप्रदेश के आर्किटेक्ट की मदद ली जा रही है। विधानसभा अधिकारियों कर्मचारियों के लिये आवास बनाने की योजना तैयार की गई है।

छुट्टी पर सन्नाटा रहेगा

वर्ष 2025 के खत्म होने के पहले मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय व जिलो तक अधिकारी कर्मचारी छुट्टी लेकर नये साल मनाने निकल रहे है। ऐसे में कई विभागों में अधिकारी कर्मचारी नदारद रहेंगे, कामकाज प्रभावित रहेगा। अभी से अधिकारी छुट्टी में निकल रहे है इसलिये अगले सप्ताह काम का माहौल कम रहेगा। नये साल में नये जोश के साथ काम करने की उम्मीद की जा सकती है।

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