SULAKSHANA PANDIT DEATH : Bollywood and the music world have lost a shining star…
नई दिल्ली। 1970 के दशक की मशहूर अभिनेत्री और पार्श्व गायिका सुलक्षणा पंडित का गुरुवार को निधन हो गया। परिवारिक सूत्रों के अनुसार, वह 68 वर्ष की थीं और कुछ समय से अस्वस्थ थीं। उनका निधन मुंबई के नानावटी अस्पताल में हुआ। उनके भाई और संगीतकार ललित पंडित ने बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर किया जाएगा।
सुलक्षणा पंडित का करियर 1970 के दशक में शुरू हुआ। उन्होंने अभिनेत्री के रूप में अपने अभिनय का परिचय 1975 में फिल्म ‘उलझन’ से दिया, जिसमें उन्होंने संजीव कुमार के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने ‘संकोच’, ‘हेराफेरी’, ‘अपनापन’, ‘खानदान’, ‘चेहरे पे चेहरा’, ‘धर्म कांटा’ और ‘वक्त की दीवार’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। उन्होंने 1978 में बंगाली फिल्म ‘बंदी’ में उत्तम कुमार के साथ भी अभिनय किया।
सुलक्षणा ने अपनी गायिकी से भी संगीत जगत में नाम कमाया। उन्होंने 1967 में फिल्म ‘तकदीर’ के गीत ‘सात समुंदर पार से’ से लता मंगेशकर के साथ गायन की शुरुआत की। उन्होंने किशोर कुमार, हेमंत कुमार और कई अन्य दिग्गजों के साथ गाने रिकॉर्ड किए। उन्होंने हिंदी, बंगाली, मराठी, उड़िया और गुजराती सहित कई भाषाओं में गीत गाए।
1980 में उन्होंने एल्बम ‘जज़्बात’ जारी किया और ग़ज़ल गायिका के रूप में भी लोकप्रिय हुईं। 1986 में वह लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में हुए ‘भारतीय संगीत महोत्सव’ में प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनके युगल गीतों में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, शैलेंद्र सिंह और येसुदास जैसे महान गायकों के साथ काम शामिल है। उन्होंने शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, कल्याणजी-आनंदजी, बप्पी लाहिड़ी, राजेश रोशन और कई अन्य संगीत निर्देशकों के साथ काम किया।
उनका अंतिम रिकॉर्डेड योगदान 1996 की फिल्म ‘खामोशी द म्यूजिकल’ में गीत ‘सागर किनारे भी दो दिल’ में अलाप के रूप में था, जिसे उनके भाइयों जतिन-ललित ने संगीतबद्ध किया।
सुलक्षणा पंडित का जाना बॉलीवुड और संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
