H1B VISA: Visa decision breaks the hearts of Indians!
नई दिल्ली, 21 सितंबर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अचानक निर्णय ने H-1B वीजा धारकों और बड़ी टेक कंपनियों में हड़कंप मचा दिया। ट्रंप के अनुसार, विदेशी कर्मचारियों के लिए वीजा फीस 100,000 डॉलर कर दी गई थी, जिससे अमेज़ॅन, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य कंपनियों को अपने कर्मचारियों को एक दिन में अमेरिका वापस बुलाने का निर्देश देना पड़ा।
इस फैसले के चलते कई भारतीय कर्मचारी पारिवारिक कार्यक्रम और लंबी प्लान की गई यात्राओं को बीच में ही छोड़कर एयरपोर्ट तक भागने को मजबूर हुए। रेडिट यूजर ‘सरमुच’ ने बताया कि उनकी मां से मिलने का महीनों पुराना इंतजार भी इस अचानक फैसले के कारण अधूरा रह गया।
ट्रंप फैसले से अफरा-तफरी :
कंपनियों ने तुरंत कर्मचारियों को ईमेल कर 21 सितंबर सुबह 9:31 बजे तक अमेरिका लौटने को कहा।
कई लोग अपनी शादी की यात्राएं और व्यक्तिगत कार्यक्रम रद्द कर चुके थे।
एयरपोर्ट पर खड़े लोग और छुट्टियों पर गए कर्मचारी समझ नहीं पा रहे थे कि अब क्या करें।
आदेश में अस्पष्टता :
आदेश में स्पष्ट विवरण न होने से कर्मचारियों और परिवारों में भ्रम फैला।
कई लोगों को नहीं पता था कि 100,000 डॉलर का भुगतान कैसे होगा या प्रक्रिया क्या होगी।
राहत की खबर :
बाद में व्हाइट हाउस ने कहा कि कंपनियों को H-1B वर्कर्स के लिए अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी, जिससे राहत मिली, लेकिन तब तक कई परिवारों और कर्मचारियों को भावनात्मक और वित्तीय नुकसान हो चुका था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अचानक फैसलों से विदेश में फंसे भारतीय H-1B होल्डर्स की जिंदगी और करियर प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले ने टेक कंपनियों और उनके विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिकी सपना अचानक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

