बाघ का आतंक… एक साथ तीन महिला को उतारा मौत के घाट, मचा हड़कंप

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नागपुर : मध्य भारत के टाइगर बेल्ट में एक दुखद घटना हुई। शनिवार दोपहर को एक बाघ ने एक ही हमले में तीन महिलाओं को मार डाला। यह पहली बार है जब एक बाघ ने एक साथ इतने लोगों की जान ली है। यह घटना सिंदेवाही वन रेंज के पास मेंढमाल गांव के जंगल में हुई। वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब एक बाघ ने एक ही हमले में तीन लोगों को मार डाला और एक को घायल कर दिया। कुछ महिलाएं तेंदू पत्ता इकट्ठा करने जंगल में गई थीं। तभी एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया।

 

मृतकों की पहचान कांताबाई चौधरी (55 वर्ष), उनकी बहू शुभांगी चौधरी (30 वर्ष) और सारिका शेंडे (50 वर्ष) के रूप में हुई है। एक चौथी महिला भी गंभीर रूप से घायल हो गई है, जिसकी पहचान अभी तक नहीं बताई गई है। शव डोंगांव बीट के कंपार्टमेंट नंबर 1355 में पाए गए, जो सिंदेवाही से 8 किमी दूर है।

बाघ की पहचान के लिए लगी टीमें

घटना के तुरंत बाद, वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया। वन विभाग ने बाघ की पहचान करने के लिए इलाके में कैमरे लगाए हैं।

 

 

इलाके की गश्त बढ़ाई गई

वरिष्ठ वन अधिकारियों ने कहा कि एक बार जब बाघ की पहचान हो जाएगी, तो उसे बेहोश करने और पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को औपचारिक अनुरोध भेजा जाएगा। गांव वाले इस हमले से बहुत दुखी हैं। उन्होंने बाघ को तुरंत पकड़ने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और लोगों को जंगल में न जाने की चेतावनी दी है।

विधायक विजय वडेट्टीवार भड़के

स्थानीय MLA और पूर्व मंत्री विजय वडेट्टीवार ने कहा कि स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने कहा कि गांव वाले बहुत गुस्से में हैं। किसी को तो इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी होगी। हमने बार-बार इन बाघों को दूसरी जगह भेजने की मांग की है, लेकिन अधिकारियों ने हमारी बात को गंभीरता से नहीं लिया।

चंद्रपुर के MLA किशोर जोरगेवार ने भी वडेट्टीवार की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों को इन मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। चंद्रपुर जिले में हमारे पास बहुत सारे बाघ हैं। उन्हें तुरंत यहां से हटाना चाहिए। वन विभाग ने मृतकों के परिवार वालों को 25,000 रुपये की तत्काल सहायता देने की घोषणा की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि वन्यजीवों के रहने की जगह कम होती जा रही है। महाराष्ट्र में पिछले तीन सालों में जंगली जानवरों के हमलों में 225 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें बाघों के हमलों में हुई हैं।

चंद्रपुर में चिंताजनक स्थिति

इस हमले के साथ, चंद्रपुर जिले में 2025 में वन्यजीवों से संबंधित मौतों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। ये सभी मौतें बाघों के हमलों में हुई हैं। पिछले साल, ऐसी 29 मौतें हुई थीं, जिनमें से 27 बाघों के हमलों में हुई थीं। 2023 में, यह संख्या 25 थी। सबसे ज्यादा मौतें 2022 में हुई थीं, जब 51 लोग मारे गए थे। इनमें से 44 को बाघों ने और 7 को तेंदुओं ने मारा था।

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