CG High Court: High Court gets tough on the issue of toxic water in rivers!
CG HIGHCOURT: बिलासपुर हाई कोर्ट ने प्रदेश के शराब फैक्ट्रियों से निकल रहे जहरीले पानी के मामले में सख्त रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के डीबी ने मामले में सुनवाई करते हुए वास्तविक स्थिति को जानने के लिए दो अधिवक्ताओं को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है।
कोर्ट कमिश्नर प्रदेश के तीन शराब डिस्टलरी यूनिट्स का संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इन्हें अपना रिपोर्ट आगामी 30 दिनों के भीतर सौंपनी होगी।
मामले में आगामी सुनवाई 6 जुलाई तय की गई है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने मीडिया में आई खबर को स्वतः संज्ञान लिया था और बिलासपुर के शिवनाथ नदी में प्रदूषण से मरी मछलियों को गम्भीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से जवाब तलब किया था।
आबकारी नीति में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज और ट्रीटमेंट अनिवार्य का साफ उल्लेख है।
यानी बिना ट्रीटमेंट के नदी, नाला, जमीन या जल स्त्रोत में गंदगी को छोड़ने पर सख्त प्रतिबंध है। जब फैक्ट्री यह लिखित में देती है ट्रीटमेंट प्लांट लगाएगी तभी उसे पर्यावरण की एनओसी दी जाती है।
उल्लंघन करने पर लाइसेंस निरस्त भी किया जा सकता है।
अब देखना होगा की कोर्ट कमिश्नर अपनी रिपोर्ट में क्या कुछ लिखते है और कोर्ट इसके बाद क्या फैसला लेती है?

