TEMPLE-MOSQUE DISPUTES: Statements of Mohan Bhagwat and Rambhadracharya on temple-mosque dispute, increasing tension in UP
उत्तर प्रदेश में हाल ही में मंदिर-मस्जिद विवादों के मामले फिर से सुर्खियों में हैं। खासकर, पिछले महीने संभल जिले में इस मुद्दे को लेकर सांप्रदायिक तनाव इतना बढ़ गया था कि चार लोगों की जान चली गई। इसके बाद से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। इस माह 19 दिसंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई, जिस पर अब जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जताई चिंता
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को सहजीवन व्याख्यानमाला में ‘भारत-विश्वगुरु’ विषय पर व्याख्यान देते हुए समावेशी समाज की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया को यह दिखाना चाहिए कि यहां लोग सद्भावना के साथ रह सकते हैं और यह केवल हिंदू समाज की विशेषता है। भागवत ने कहा, “हमारे यहां हमारी ही बातें सही, बाकी सब गलत यह नहीं चलेगा. हमें एकजुट होकर रहना होगा, और दूसरों की श्रद्धा का सम्मान करना होगा।”
जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बयान
आरएसएस प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, “वह किसी संगठन के प्रमुख हो सकते हैं, लेकिन वह हिंदू धर्म के नेता नहीं हैं कि हमें उनकी बात सुननी पड़े। हिंदू धर्म के लिए जिम्मेदार संत और ऋषि हैं, न कि वह।” रामभद्राचार्य ने मोहन भागवत की धार्मिक नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट किया कि धार्मिक मामलों में उनका कोई स्थान नहीं है।
उत्तर प्रदेश में बढ़ते विवादों का असर
हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में मंदिर-मस्जिद विवादों की बाढ़ सी आ गई है, जो न केवल सामाजिक, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर रही है। ये विवाद खासकर धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और उनके ऐतिहासिक महत्व से जुड़े हुए हैं। अब देखना यह होगा कि इन विवादों के समाधान को लेकर सरकार और धार्मिक संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रहती है।
