कोलंबिया: कुछ देशों में शादी से जुड़े कई रीति-रिवाज ऐसे हैं, जिन्हें सुनकर लोगों के होश उड़ जाएंगे। एक देश ऐसा भी है जहां बेटी को अपनी ही मां के सामने अपनी सुहागरात मनानी पड़ती है। मां के सामने सुहागरात मनाने के बाद ही लड़की की विदाई की जाती है। कोलंबिया में काली नामक जगह पर रहने वाले लोग इस अनोखी परंपरा को मनाते हैं। इस परंपरा के अनुसार लड़की की शादी होने के बाद उसे अपनी सुहागरात, मां के सामने मनानी होती हैं।
शादी संपन्न होने के बाद नए जोड़े को सुहागरात मनाने के लिए एक अलग कमरा दिया जाता है। दोनों के सुहागरात के समय दुल्हन की मां कमरे में मौजूद रहती है। वह कमरे में तब तक बैठी रहती हैं, जब तक पति-पत्नी सुहागरात न मना लें। काली में यह रिवाज वर्षों से चला आ रहा है। लेकिन आज के समय में भी यहां के लोग इस रिवाज को निभा रहे हैं।
यहां पर आज भी कई ऐसे अजीबोगरीब रीति-रिवाज और विचित्र मान्यताएं चलन में हैं जिनके बारे में लोगों को कम जानकारी है। खासकर शादी ब्याह की बात करें तो शादी से जुड़ी एक बेहद विचित्र मान्यता है जिसे सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। समय के साथ जहां परम्परा में परिवर्तन होते जा रहे हैं, वहीं यहां के लोग अभी भी सालों पुरानी परंपराओं को जी रहे हैं। कई सारी जनजातियां जीवन के हर पड़ाव पर अलग-अलग नियमों का पालन करते हैं। ऐसा ही एक नियम सुहागरात से भी जुड़ा है। यहां पर सुहागरात के वक्त दुल्हन की मां उसके और दूल्हे के साथ सोती है।
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सुहागरात में साथ होती है मां
Peculiar Tradition of Africa: एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुहागरात पर दामाद की सासू मां कमरे में साथ रहती और सोती है। अगर वो नहीं होती है तो इस स्थिति में परिवार या आस-पड़ोस की किसी अन्य बुजुर्ग महिला को वहां पर जरूर भेजा जाता है। अगले दिन सुबह में दूल्हे और दुल्हन के कमरे में मौजूद महिला परिवार के बाकी सदस्यों को इस बात की पुष्टि करते हुए बताती है कि रात में सबकुछ ठीक रहा। इस तरह से मान लिया जाता है कि नवविवाहित जोड़े ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत अच्छी तरह से की है।
ये है मान्यता
Peculiar Tradition of Africa: दरअसल मान्यता ये है कि पहली रात को मां या फिर बुजुर्ग महिला कपल को खुशहाल वैवाहिक जीवन की सीख देती है। यही मेंटर यानी मां दुल्हन को यह बताती है कि उसे रात में क्या करना है। इस मेंटर की मौजूदगी को यहां शर्म से नहीं बल्कि उस रस्म से जोड़कर देखा जाता है, जिसका पालन आज भी हो रहा है।

