रायपुर। पति-पत्नी के बीच दहेज के सामान को लेकर उपजे विवाद की सुनवाई करते हुए राज्य महिला आयोग ने आवेदिका को 68 तोला सोना और 19 किलो 750 ग्राम चांदी वापस कराया।
इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आयोग द्वारा पति-पत्नी को समझाइश दिया गया और दोनों के मध्य काउंसलिंग कराया गया जिसपर अनावेदक पति अपने मासिक वेतन 15 हजार रुपये में से सात हजार रुपये आवेदिका पत्नी और बच्चे को भरण पोषण देने के लिए तैयार हुआ। साथ ही पति ने आयोग के समक्ष निवेदन किया कि अपने चार वर्षीय पुत्र को सप्ताह में दो दिन मिल सकूं, इस पर आवेदिका ने सहमति दी। इस प्रकरण छह माह की निगरानी में रखते हुए नस्तीबद्ध किया गया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डा. किरणमयी नायक ने इस मामले में निर्णय दिया।
इस प्रकार एक अन्य प्रकरण में पति-पत्नी के मध्य आयोग द्वारा समझौता कराया गया। आयोग की समझाइश के बाद जिसमें पति-पत्नी अपने दो बच्चों के साथ अपने संबंध सुधारने को तैयार हुए। पति को समझाया गया कि वह अपनी पत्नी को भविष्य में किसी भी प्रकार से परेशान नही करेगा। इस समझाइश के साथ इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि मेरे पति के नाम पर पट्टे की जमीन पर मकान बनाया गया था, जिसमे पति का छोटा भाई (देवर) रहने लगा और अब वह अपना अलग मकान बनाकर किराए पर रखा है। मेरे मकान को वह खाली नही कर रहा है। अनावेदक की उम्र लगभग 42 वर्ष है। अनावेदक का कथन है कि वह उस मकान में 20 वर्ष से उसमें रह रहा है।
आयोग के द्वारा विस्तार से दोनो पक्षों को सुना गया जिसमें स्पष्ट है कि अनावेदक झूठ बोल रहा है और आवेदिका से 2 लाख 50 हजार रुपये की चाह रख रहा है। दोनो पक्षकार की बातों को प्रमाणित करने के लिए आयोग की ओर से काउंसलर नियुक्त किया गया है काउंसलर मौके पर उस स्थान पर जाएंगी और वहां निवासरत लोगो का बयान दर्ज कर आयोग को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
दूसरी महिला को भेजा नारी निकेतन
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक पति, दूसरी महिला को अपने घर पर लाकर रखा है। वह महिला दूसरी पत्नी बनकर रहना चाहती है। उसका पति उसे छोड़ चुका है। अनावेदिका के रहने की व्यवस्था नहीं होने के कारण उसे सखी सेंटर के माध्यम से नारी निकेतन भेजे जाने की अनुसंशा की गई।

