CG IAS-IPS TRANSFER : साय सरकार का बड़ा एक्शन – ‘जो करेगा, वही रहेगा!’ – अफसरशाही में भूचाल !

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CG IAS-IPS TRANSFER : Big action by Sai Government – ‘Whoever does, will remain!’ – Earthquake in bureaucracy!

रायपुर। CG IAS-IPS TRANSFER छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने हालिया प्रशासनिक और आईपीएस फेरबदल के जरिए एक बड़ा और स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है – जो काम करेगा, वही टिकेगा। प्रशासनिक कसावट, जनहित के कार्यों को गति देने, और सुशासन की दिशा में यह फेरबदल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘एक मंत्री-एक सचिव-एक अफसर’ मॉडल की शुरुआत –

CG IAS-IPS TRANSFER अब केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य में भी ‘एक मंत्री, एक सचिव, एक अफसर’ की व्यवस्था लागू की गई है। पहले एक अधिकारी को कई मंत्रियों और सचिवों को रिपोर्ट करना पड़ता था, जिससे न केवल जवाबदेही कमजोर होती थी बल्कि कामकाज में भी अड़चनें आती थीं। इस नई व्यवस्था से कार्यान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है।

नई जिम्मेदारियाँ, नया भरोसा –

डॉ. प्रियंका शुक्ला को हेल्थ कमिश्नर के साथ MD NRHM का दायित्व सौंपा गया है।

किरण कौशल को फूड मिनिस्ट्री के अंतर्गत MD मार्कफेड और MD नॉन बनाया गया है।

अवनीश शरण को डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के साथ कमिश्नर हाउसिंग बोर्ड का जिम्मा मिला।

कार्तिकेय गोयल को डायरेक्टर फूड और MD वेयरहाउसिंग बनाया गया।

योग्य प्रमोटी IAS अफसरों और अच्छे प्रदर्शन करने वाले कलेक्टरों को बड़े जिलों की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे एक बार फिर यह साबित हुआ है कि कार्यकुशलता ही पदोन्नति का आधार बनेगी।

नकारात्मक प्रदर्शन पर सख्त कार्रवाई

CG IAS-IPS TRANSFER जिन अधिकारियों पर लापरवाही, सार्वजनिक असंतोष या शिकायतें दर्ज थीं, उन्हें कम महत्वपूर्ण पदों पर भेजकर यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि साय सरकार में न तो हीलाहवाली चलेगी, न ही जनता की अनदेखी।

आईपीएस फेरबदल भी अहम संदेश

राज्य में आईपीएस अधिकारियों का भी तबादला किया गया। नॉन परफॉर्मेंस वाले अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जबकि विजय अग्रवाल जैसे दक्ष और जन-फ्रेंडली अधिकारी को दुर्ग जैसे प्रमुख जिले की कमान दी गई है।

CG IAS-IPS TRANSFER हालांकि एक बदलाव पर सवाल भी खड़े हुए – पवनदेव, जो पिछले छह वर्षों से पुलिस हाउसिंग में MD थे, अब उन्हें चेयरमैन बनाया गया है। इसे लेकर यह टिप्पणी सामने आई – “इधर से कान पकड़े या उधर से, बात एक ही है।”

 

 

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