चुनौतियों को अवसरों में बदला देश के युवाओं ने: अजीत डोभाल

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राज्य और देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय क्षितीज में रोशन
करें विद्यार्थी-राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके
मैट्स यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री के
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डा. अजीत डोभाल का संदेश
दीक्षांत समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद की गूंज, विद्यार्थियों ने
भारतीय पारंपरिक परिधान में प्राप्त की उपाधि और स्वर्ण पदक
रायपुर।  विश्व एक निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने  कई सामाजिक, आर्थिक चुनौतियों को जन्म दिया है, यह हमारी युवा शक्ति के योगदान से ही संभव हो पाया कि भारत ने चुनौतियों को अवसरों परिवर्तित कर दिखाया। आज के समय में कोरोना वैक्सीन का खोज. एक बड़ी संख्या का टीकाकरण एवं नवीन तकनीकी का उपयोग कर व्यवसाय, शिक्षा आदि क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना युवा शक्ति का उदाहरण है।
यह बातें मैट्स यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डा. अजीत डोभाल ने अपने वीडियो संदेश में कहीं। डॉ. डोभाल ने दीक्षांत समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रण स्वीकार किया था किन्तु स्वास्थ्यगत कारणों से नहीं आ सके। उन्होंने दीक्षांत समारोह में अपना वक्तव्य प्रेषित किया जिसे विधिवत प्रसारित किया गया। उन्होंने अपने संदेश  में कहा कि आज मुझे अपने छात्र जीवन का स्मरण हो रहा है। विश्वविद्यालय न सिर्फ शैक्षणिक ज्ञान व कौशल  प्रदान करता है बल्कि व्यक्तित्व के विभिन्न आयमों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र में बदलाव का आधार युवा शक्ति होता है। आजादी का  संघर्ष हो, देश की सुरक्षा का विषय हो, आर्थिक उन्नति या समाजिक परिवर्तन हो, युवा ही केंद्र-बिन्दु रहा है। भारत की जनता में एक बड़ा हिस्सा युवाओं का है जहाँ अगले 30-35 वर्षों में  चीन, अमेरिका, जापान जैसे विकसित देश अपने उम्रदराज होती जनसंख्या से जूझ रहे होंगे वहीं युवा शक्ति हमारे लिए जनसांख्यिकी लाभांश का एक महत्वपूर्ण बिन्दु रहेगी। देश के विकास में इस स्थिति का सम्पूर्ण लाभ लेना है तो आप सबको भारत की उन्नति के लिए सक्रिय प्रतिभागी बनना होगा। डॉ. डोभाल ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी जीवन के अगले प़ड़ाव में कदम रखने जा रहे है। आप अपने जीवन में कोई भी राह चुनें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आप जो भी निर्णय लें, जो भी कार्य करें वह आपके व्यक्तिगत हितों के साथ-साथ सामाजिक व राष्ट्र हित में होना आवश्यक है। यह हमेशा याद रखें कि आपका किसी भी कार्य में शत-प्रतिशत योगदान दें।
दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा कि खुशी की बात है कि मैट्स विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक कर्तव्यों के निर्वहन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है चरित्र का निर्माण करना, विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना और उपाधि देना ही शिक्षक-धर्म नहीं है, बल्कि उनमें नव-चेतना का जागरण कर उनका सर्वांगीण विकास करना है। हर शैक्षणिक संस्थान का लक्ष्य होना चाहिए कि देश के विद्यार्थियों को बेहतर और संपूर्ण इंसान बनाएँ। दीक्षांत समारोह का यह क्षण आप सभी के ज्ञान, आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने वाला अप्रतिम अवसर है। इस अनमोल क्षण में उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों से मैं यह कहना चाहूंगी कि एकमात्र उपाधि हासिल करना ही आपके जीवन का मकसद नहीं होना चाहिए। उपाधि प्राप्त करने के बाद अब आप यहाँ से अपने जीवन के कर्म-क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, जहाँ आपको अपनी क्षमता एवं प्रतिभा से अपनी सही पहचान स्थापित करनी है। आप सभी सदैव अपने मजबूत इरादों के साथ लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहें और अपनी प्रतिभा के बल पर न सिर्फ अपने माता-पिता, परिवार, विश्वविद्यालय बल्कि समाज, राज्य और देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय क्षितीज में रोशन करें।
दीक्षांत समारोह के सम्मानीय अतिथि उच्च शिक्षा, तकनीकी,  रोजगार कौशल मंत्री  श्री उमेश नंदकुमार  पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन की जरूरत है। हमं् समय के साथ तकनीकियों में भी बदलाव करने होंगे। इसके लिए योजनाएँ बनाई जा रही हैं और निजी शैक्षणिक संस्थाओं की भी भागीदारी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं।
समारोह  के विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. शिववरण शुक्ल ने विद्यार्थियों से आव्हान किया कि वे अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थी अपनी विशेषताओं को निखारें और आगे बढ़ें।
मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री गजराज  पगारिया ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है और इसी का परिणाम है कि हमारे संस्थान से स्नातक से लेकर पीएच.डी. तक की उपाधि प्राप्त करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थी पूरे देश में नाम रोशन कर रहे हैं। श्री पगारिया ने बाताया कि सामाजिक कर्तव्यों के निर्वहन कि दिशा में कार्य करते हुए मैट्स कॉलेज के अंतर्गत 1600 से अधिक ग्रामीण बच्चों से सिर्फ 15 प्रतिशत फीस ली जा रही है तथा 85 प्रतिशत स्कॉलरशिप का लाभ दिया जा रहा है। स्थापना से लेकर अब तक लगभग एक लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं।
इसके पूर्व स्वागत भाषण में मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. के.पी. यादव ने कहा कि हमारा यही प्रयास रहता  है कि विद्यार्थी एक सामाजिक, सुसंस्कृत और कुशल नागरिक के रूप में विकसित हों तथा वै नैतिकवान एवं चरित्रवान बनें। इस अवसर पर मैट्स यूनिवर्सिटी के महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया, उपकुलपति डॉ. दीपिका ढांढ सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, विद्यार्थीगण एवं गणममान्य  नागरिक उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह के समापन अवसर पर मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलसचिव श्री गोकुलनंदा पंडा ने सभी अतिथियों के प्रति ह्रदय से आभार व्यक्त किया।

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