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नई राजधानी प्रभावित किसान आंदोलन खत्म करने तैयार नहीं,आठ में से ही तीन ही मांगे माने हैं..

सरकार का कहना है किसानों की छह मांगे मान ली गई हैं
रायपुर
। दो माह हो गए नई राजधानी प्रभावित किसानों का आंदोलन जारी है। सरकार कहती है कि अधिकांश मांगे मान ली गई है इसलिए किसान आंदोलन समाप्त करें। वहीं किसान समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर कहते हैं कि हमने आठ मांगें की थीं, इसमें से 3 को इन्होंने माना है वह भी आधा अधूरा। यह वही मांगें हैं जो सशक्त समिति की 2012 में हुई 12वीं बैठक में तय हो चुका था। उसका समग्र परिपालन न तो पिछली भाजपा सरकार ने किया और न ही मौजूदा कांग्रेस सरकार कर रही है। उन्हीं पूर्व निर्णयों को नई शर्तें लादकर आधा-अधूरा आदेश जारी हुआ है।
रूपन चंद्राकर ने कहा, हम सरकार से निवेदन कर रहे हैं, मौजूदा सरकार के गठन से पहले हमारे साथ जो वादा किया था उसे पूरा कर दें। सरकार सारे मुद्दों पर किसानों को अपना फैसला दे दे। हम आंदोलन छोड़ देंगे और सरकार का सम्मान भी करेंगे। सरकार मांग नहीं मानेगी तो आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों की पूरी मांग क्या है–
0 सन 2005 से स्वतंत्र भू क्रय-विक्रय पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
0 प्रभावित 27 ग्रामों को घोषित नगरीय क्षेत्र की अधिसूचना निरस्त की जाए।
0 सम्पूर्ण ग्रामीण बसाहट का पट्टा दिया जाए।
0 प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक वयस्क व्यक्ति को 1200 वर्ग फीट विकसित भूखण्ड का वितरण किया जाए।
0 आपसी सहमति, भू-अर्जन के तहत अर्जित भूमि के अनुपात में शुल्क आवंटन।अर्जित भूमि पर वार्षिकी राशि का भुगतान तत्काल दिया जाए।सशक्त समिति की 12वीं बैठक के निर्णयों का पूर्णतया पालन हो।
0 मुआवजा प्राप्त नहीं हुए भू.स्वामियों को चार गुना मुआवजे का प्रावधान हो।
सरकार का क्या रुख है–
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया है कि किसानों की छह मांगे मान ली गई हैं। पट्टा वितरण का काम 7 मार्च से शुरू हो रहा है। 41 में से 13 गांवों कुहेरा, परसदा, पलौद, कोटनी, तांदुल, खंडवा, पचेड़ा, भेलवाडीह, तेंदुआ, पौता, बंजारी, चेरिया और कुर्रू में जमीन बेचने-खरीदने के लिए एनओसी लेने की आवश्यकता खत्म कर दी गई है। दुकान, गुमटी, चबूतरा और हॉल का आवंटन लागत मूल्य पर प्रभावित ग्रामीणों को लॉटरी के आधार पर करने का आदेश जारी है। एनआरडीए की संविदा सेवाओं में प्रभावित किसानों को 60 प्रश आरक्षण की बात मान ली गई है। वहीं वार्षिकी ऑडिट आपत्तियों के निराकरण के बाद वार्षिकी राशि का भी भुगतान किया जाएगा। सरकार किसानों के साथ हैं वे आंदोलन समाप्त तो करें।

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