STRAY DOGS HEARING : कुत्तों पर कानून पहले से, कोर्ट का दखल जरूरी नहीं – सिंघवी

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STRAY DOGS HEARING : Law on dogs already in place, court intervention not necessary: ​​Singhvi

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में तीखी बहस देखने को मिली। याचिकाकर्ता संस्था ACGS (All Creatures Great and Small) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से इस मामले में दखल न देने की अपील की।

सिंघवी ने दलील दी कि आवारा कुत्तों को लेकर कानून और नियम पहले से मौजूद हैं। जब संसद जानबूझकर हस्तक्षेप नहीं कर रही है, तो अदालत को भी इस दायरे में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एमीकस क्यूरी कानून के जानकार होते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे पशु, स्वास्थ्य या पर्यावरण जैसे विषयों के विशेषज्ञ हों। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स को शामिल किया जाना चाहिए।

इस दौरान अरावली पहाड़ियों के मामले का भी जिक्र हुआ, जहां एक्सपर्ट राय न होने के कारण कोर्ट को अपने पुराने फैसले पर रोक लगानी पड़ी थी। सिंघवी ने इसी आधार पर आवारा कुत्तों के मुद्दे में भी विशेषज्ञों की राय जरूरी बताई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कई मामलों में सख्त टिप्पणियां कीं। माइक्रो-चिप लगाने के सुझाव पर उन्होंने सवाल उठाया कि भारत जैसी आबादी वाले देश में यह व्यावहारिक रूप से कितना संभव है। वहीं AIIMS में कुत्तों के रहने का उदाहरण देने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े होते हैं और अस्पतालों में उनकी मौजूदगी खतरनाक हो सकती है।

महिला वकीलों ने कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराना कानून व्यवस्था का विषय है, कोर्ट हर व्यक्तिगत घटना में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

एक वकील ने सुझाव दिया कि अस्पताल, मुख्य सड़कें और सार्वजनिक स्थानों को आवारा कुत्तों से मुक्त जोन घोषित किया जाए। साथ ही फीडिंग जोन तय करने, एनीमल बर्थ कंट्रोल नियमों को सख्ती से लागू करने और हर नगर निगम में जवाबदेह अधिकारी नियुक्त करने की बात रखी गई। कोर्ट ने इन सुझावों को संतुलित बताते हुए कहा कि इस पर सभी पक्षों की राय सुनी जाएगी।

करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को तय की है। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि बहस पूरी होने के बाद वह इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा।

 

 

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