सुखताल पंचायत विवाद: हाईकोर्ट आदेश धरा रह गया, सचिव पर कार्रवाई ठप—सरपंच अनशन

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सुखताल: ग्राम पंचायत सुखताल में पिछले एक वर्षों से प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं। पंचायत के सचिव अशोक वर्मा जो इसी गांव के निवासी हैं, लगातार विवादों के केंद्र में बने हुए हैं। नियमानुसार किसी भी कर्मचारी को उसके ही गांव में सचिव के रूप में पदस्थ नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके बावजूद सचिन को ग्राम पंचायत सुखताल में सचिव बनाकर रखा गया है, जो स्वयं नियमों का उल्लंघन है।

1. सरपंच के कार्य मैं बाधा किए जाने के आरोप

ग्राम पंचायत की महिला सरपंच ने आरोप लगाया है कि सचिव की माता ने सरपंच चुनाव में उनके खिलाफ प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और हार गई थीं। इसी राजनीतिक रंजिश के कारण सचिव लगातार सरपंच के कार्यों में बाधा पहुँचा रहा है। सचिव पिछले डेढ़ से सवा साल से एक भी दिन कार्यालय नहीं आया। 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय आयोजनों में भी सचिव अनुपस्थित रहा।

2. पंचायत का कार्यालय वर्षों से बंद

पिछले1 वर्षों से चल रहे विवाद के कारण पंचायत कार्यालय का ताला तक नहीं खुल रहा। ऑफिस में न ताला खुल रहा, न कोई सरकारी कार्य हो पा रहा है। ग्रामीणों के विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हैं।

3. हाई कोर्ट का आदेश – लेकिन प्रशासन मौन

सरपंच ने सचिव के व्यवहार और अनियमितता के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि— कलेक्टर कबीरधाम और CEO जिला पंचायत को एक सप्ताह के भीतर सचिव को हटाकर कार्रवाई की सूचना हाई कोर्ट को देना अनिवार्य है।

लेकिन आदेश के कई सप्ताह/महीनों बाद भी कलेक्टर तथा CEO ने कोई कार्रवाई नहीं की। कलेक्टर और जिला पंचायत प्रशासन पर राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई न करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। जबकि पंचायती राज अधिनियम के अनुसार सचिव को हटाया जा सकता है, सरपंच को नहीं।

4. महिला सरपंच की अनदेखी

 

यह उल्लेखनीय है कि सरपंच— महिला हैं, पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षित हैं, फिर भी उनकी शिकायतों को लगातार अनसुना किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा न कोई जांच की गई, न ही सचिव के विरुद्ध निलंबन या स्थानांतरण की कार्रवाई।

 

5. सरपंच का अनशन का निर्णय

लगातार उपेक्षा और अदालत के आदेश के पालन न होने से निराश होकर महिला सरपंच अनशन पर बैठने के लिए मजबूर हो रही हैं। उनका कहना है कि— “जब हाई कोर्ट का आदेश भी प्रशासन नहीं मान रहा, तब एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि के लिए न्याय पाने का रास्ता क्या बचा है?”

निष्कर्ष

ग्राम पंचायत सुखताल में सचिव की नियुक्ति नियम विरुद्ध, कार्यालय वर्षों से बंद, हाई कोर्ट का आदेश भी अनुपालन में नहीं, प्रशासनिक मौन, राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप, विकास कार्य पूरी तरह रुके हुए हैं। यह मामला न केवल पंचायत व्यवस्था बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता ह

पत्रकार दीपक तिवारी कवर्धा जिला कबीरधाम

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