ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पहला सैन्य अभ्यास शुरू, चीन से सटे देश में ट्रेनिंग ले रहे जवान

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नई दिल्ली। भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच सालाना संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट 2025’ उलानबटार में 31 मई से शुरू हो गया है। पाकिस्तान के खिलाफ आपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना का यह पहला अंतरराष्ट्रीय संयुक्त अभ्यास इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि चीन से अच्छे रिश्ते होने के बावजूद भारत से अपने मैत्रीपूर्ण तथा रणनीतिक संबंधों को मंगोलिया बेहद अहम मानता है।

भारत का भरोसेमंद साथी मंगोलिया

भारत के कई निकटस्थ पड़ोसी देशों से उतार-चढ़ाव के संबंधों के बीच मंगोलिया एशिया में भारत का एक भरोसेमंद सामरिक तथा आर्थिक सहयोगी है। भारत-मंगोलिया के बीच रिश्तों की प्रगाढ़ता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि दोनों देशों का संयुक्त सैन्य अभ्यास नोमैडिक एलीफेंट का यह 17वां संस्करण है।

मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित विशेष बल प्रशिक्षण केंद्र में संयुक्त अभ्यास शुरू होने के मौके पर वहां स्थित भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे और मंगोलियाई की ओर से मेजर जनरल लखगवासुरेन गनसेलम सहित ने इसमें भाग लेने वाले दोनों सैनिकों को अपनी शुभकामनाएं दीं। साथ ही उम्मीद जताई कि यह अभ्यास दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच अधिक सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देगा।

 

दोनों देशों की ओर से इस बात पर भी जोर दिया गया कि यह संयुक्त अभ्यास न केवल दोनों सेनाओं की आपरेशन तैयारियों को बढ़ाएगा, बल्कि भारत-मंगोलिया के स्थायी रक्षा संबंधों को मजबूत करने में भी योगदान देगा।

मंगोलिया का भारत से सांस्कृतिक जुड़ाव

सामरिक रिश्तों के अलावा बौद्ध संस्कृति-परंपरा का अनुसरण करने के लिए पहचाने जाने वाले मंगोलिया का भारत से सांस्कृतिक जुड़ाव सहज है, जबकि आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों का सहयोग निरंतर बढ़ रहा है।

मंगोलिया को पेट्रोलियम रिफाइनरी के निर्माण के लिए दिए जाने वाले कर्ज की सीमा भारत ने दिनों में कुछ समय पहले एक अरब डालर कर दी थी, जबकि भारत को अपनी तांबा और कोयले की जरूरत पूरा करने के लिए मंगोलिया एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार है।

13 जून तक चलेगा संयुक्त अभ्यास

भारतीय सेना के अनुसार 13 जून तक चलने वाले संयुक्त अभ्यास के दौरान गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला होगी जो भारत और मंगोलिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाती है। विशेष रूप से संयुक्त अभ्यास में अर्ध-पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान शामिल होंगे। पहलगाम जैसे आतंकी की ताजा घटनाओं के सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए आतंकवाद विरोधी आपरेशन्स सेनाओं के रण कौशल का अहम हिस्सा बन गए हैं। साझा अभ्यास में सैनिक संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के संदर्भ से जुड़ी गतिविधियों का भी पूर्वाभ्यास किया जाएगा।

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