करोड़ों रुपए के गबन मामला:पीजी कॉलेज का बाबू गिरफ्तार, पेशी के बाद कोर्ट ने भेजा जेल

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कवर्धा। शासकीय आचार्य पंथ गंध मुनि नाम साहेब स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कवर्धा में करोड़ों रुपये के गबन के प्रकरण में आज एक अहम कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी प्रमोद कुमार वर्मा, सहायक ग्रेड-2 को गिरफ्तार किया है।

 

आरोपी को विधिसम्मत न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देश पर की गई।

 

उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय प्रबंधन और जनभागीदारी समिति अध्यक्ष रिंकेश वैष्णव की शिकायत पर कॉलेज संचालन में गंभीर वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर 21 मई 2024 को थाना कवर्धा में अपराध क्रमांक 728/2024, धारा 316(5) भादवि के तहत प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज की गई थी। प्रारंभिक जांच में जनभागीदारी मद से संबंधित ₹28,32,407 की राशि का गबन सामने आया था।

 

इसके पश्चात उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने पर संपूर्ण गबन की राशि बढ़कर ₹1,22,59,125 प्रमाणित हुई। रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी में संशोधन कर आगे की विवेचना विस्तृत रूप से की गई।

 

जांच के दौरान जिन प्रमुख वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, वे इस प्रकार हैं

 

1,13,28,570 की राशि बैंक और खजाने में जमा नहीं की गई।

 

24,81,805 स्ववित्तीय मद से संबंधित राशि कम जमा की गई।

 

2,20,000 बिजली बिल के नाम पर निकाले गए, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।

 

9,40,555 की राशि मोबाइल बिल, ऑडिटोरियम किराया एवं अन्य मदों में अनियमित ढंग से उपयोग की गई।

 

प्रशासनिक जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई महत्वपूर्ण लेखा दस्तावेज जानबूझकर छिपाए गए, जिनमें से कुछ कॉलेज की अलमारी से और कुछ आरोपी के निवास स्थान से जब्त किए गए। आरोपी प्रमोद वर्मा ने स्वयं यह स्वीकार किया कि कॉलेज से संबंधित कुछ मूल रिकॉर्ड उसके पास घर पर सुरक्षित रखे थे, जिन्हें बाद में लौटाया गया।

 

पूर्व में आरोपी को शासन द्वारा निलंबित किया जा चुका है। अब अपराध प्रमाणित होने और दस्तावेजों के संकलन के बाद, विधिसम्मत गिरफ्तारी कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से आरोपी को जेल भेजा गया है।

 

इस कार्रवाई में थाना कवर्धा के प्रभारी निरीक्षक लालजी सिन्हा, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक मनीष मिश्रा, उप निरीक्षक त्रिलोक प्रधान, रजनीकांत दीवान, सहायक उप निरीक्षक शसंजीव तिवारी, राजकुमार चंद्रवंशी, बंदे सिंह मरावी, प्रधान आरक्षक वैभव कलचुरी, आरक्षक पवन राजपुर तथा सैनिक अनिल पांडे का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने संपूर्ण दस्तावेजी विश्लेषण, पूछताछ एवं साक्ष्य संकलन में सतर्कता व पेशेवर दक्षता का परिचय दिया।

 

प्रकरण की विवेचना जारी है तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका एवं गबन की शेष राशि के संबंध में भी जांच की जा रही है।

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