शिवरीनारायण। धार्मिक आस्था और पावन परंपराओं के संगम शिवरीनारायण नगर में देव दीपावली का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। शबरीनारायण मंदिर परिसर में भक्तों ने दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्रीराम–सीता सहित देवदेवताओं का पूजन किया। आकाशदीप (स्काई लाइट) छोड़कर भक्तों ने देवताओं के स्वागत का संदेश आकाश में उकेरा, जिससे संपूर्ण वातावरण दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा।
नगर के पवित्र गंगा घाट पर आयोजित विशेष गंगा आरती इस पर्व का मुख्य आकर्षण रही। मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और दीयों की लंबी कतारों ने तट को अद्भुत आध्यात्मिक छटा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने दीपदान कर अपनी मंगल कामनाएँ व्यक्त कीं।
तक्षशिला स्कूल के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी लोगों का ध्यान आकर्षित करता रहा। भक्ति गीत, समूह नृत्य और लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब प्रशंसा बटोरी। नगर की सड़कों पर दीपों, सजावट और रंगोलियों ने देव दीपावली की रौनक को और बढ़ा दिया।
देव दीपावली की मान्यता
मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध कर देवताओं को अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी। इस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने काशी सहित पवित्र तीर्थों पर दीप प्रज्ज्वलित कर उत्सव मनाया। तभी से देव दीपावली मनाने की परंपरा आरंभ हुई, जिसे देवताओं की दीपावली भी कहा जाता है।
पूरे शिवरीनारायण में देव दीपावली की अद्भुत चमक दिखाई दी और श्रद्धा, भक्ति व उत्साह से ओतप्रोत यह पर्व देर रात तक मनाया जाता रहा।
