कबीरधाम : छत्तीसगढ़ के जिला कबीरधाम के थाना पिपरिया अंतर्गत ग्राम खरोदा खुर्द में जातीय उत्पीड़न और प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर मामला सामने आया है। गांव के निवासी बलराम बंजारे एवं उनके साथियों ने करीब 5 एकड़ जमीन में मेहनत से फसल लगाई थी, लेकिन गांव के जमींदार ठाकुर सूर्य सिंह परिहार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी गायों को खेत में छोड़कर पूरी फसल चौपट कर दी।
जब बलराम बंजारे ने विरोध किया तो जमींदार पक्ष के लोगों ने गाली-गलौज और मारपीट की। इसके बाद जब पीड़ित पक्ष ने थाना पिपरिया में रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की, तो वहां भी उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार हुआ।
स्थिति और बिगड़ गई जब उल्टा बलराम बंजारे और उनके परिजनों पर ही 294, 323, 506 और बलवा की धाराओं में केस दर्ज कर तीन दिन के लिए जेल भेज दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित ने न्याय के लिए पिपरिया थाना, फिर एससी-एसटी थाना और अंत में एचडीएफसी थाना तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं भी कार्रवाई नहीं हुई।
बलराम बंजारे का कहना है कि “मैं अब अपने गांव भी नहीं जा पा रहा हूं। ठाकुर पक्ष के लोग जान से मारने की धमकी देते हैं। शिकायत देने के बाद भी पुलिस चुप है।”
ग्रामीणों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब खरोदा खुर्द में गरीब और दलित किसानों के साथ इस तरह का अत्याचार हुआ हो, लेकिन पुलिस और प्रशासन की चुप्पी ने दबंगों का हौसला बढ़ा दिया है।
अब सवाल उठता है:
क्या प्रशासन जाति देखकर न्याय देता है?
क्या गरीब की फसल उजाड़ना और जान से मारने की धमकी देना अब सामान्य हो गया है?
आखिर दलित किसान को न्याय कौन देगा?
जनता और प्रशासन दोनों इस सवाल का जवाब चाहते हैं।
