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नए संसद भवन के उद्घाटन के विरोध में कांग्रेस का मरीन ड्राइव में जल सत्याग्रह

रायपुर। नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पीकर ओम बिड़ला संसद में मौजूद हैं. वहीं नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर विपक्षी पार्टी लगातार विरोध कर रही है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने इसको लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया. राजधानी रायपुर के मरीन ड्राइव में पानी के अंदर उतर कर कांग्रेस जल सत्याग्रह कर रही है.

बता दें कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों नहीं कराया जा रहा है. जिसको लेकर विपक्ष के नेता विरोध कर रहे हैं और इसे राष्ट्रपति का अपमान बता रहे हैं. जिसको लेकर रायपुर में कांग्रेस नेता विनोद तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेसी तेलीबांधा तालाब में जल सत्याग्रह कर रहे हैं.

कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने बताया कि आज 11 बजे रायपुर के मरीन ड्राइव तेलीबांधा तालाब में नवनिर्मित संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों ना करवाने के विरोध स्वरूप जल सत्याग्रह किया. जिसने दर्जनों युवा घंटों पानी में खड़े रहे हाथों में संदेश युक्त तख्तियां लिये हुए थे. साथ ही केन्द्र सरकार विरोधी नारे लगाये जा रहे थे.

विनोद तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार सिर्फ चुनाव जीतने ओर वोट का लाभ लेने के लिए राष्ट्पति पद पर sc/st समुदाय का चयन किया है. नए संसद भवन की आधारशिला के समय भी उस समय के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को निमंत्रण नहीं दिया गया. अब नए संसद भवन का उद्धघाटन हो रहा है तो वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है, यह बहुत शर्म और दुख का विषय है. सांसद भारतीय गणतन्त्र का सर्वोच्य सदन है और राष्ट्रपति सर्वोच्य संवैधानिक पद होता है, इसलिए नवनिर्मित संसद भवन का उद्धघाटन महामहिम के हाथों करवाना चाहिए ऐसा न कर केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी की सरकार का sc/st विरोधी चेहरा उजागर हुआ है. पूरे देश मे इस बात की मांग उठ रही है कि नए सांसद भवन का उद्धघाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों ही होना चाहिए.

तिवारी ने कहा की राष्ट्रपति,जो संवैधानिक प्रमुख होता है. शासन में सर्वव्यापी होता है।संविधान के तहत, भारत संघ की कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति के पास है. राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के प्रमुख हैं और अनुच्छेद 53 बहुत स्पष्ट है कि मंत्री और अन्य सभी अधिकारी भारत के राष्ट्रपति के अधीन है. जिसमें पीएम भी शामिल है.

अनुच्छेद 299 के आधार पर प्रत्येक अनुबंध, जिस पर भारत सरकार हस्ताक्षर करती है, भारत के राष्ट्रपति के नाम पर होना चाहिए. इसलिए नए संसद भवन के निर्माण का हर अनुबंध राष्ट्रपति के नाम पर होना चाहिए.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दरकिनार कर सरकार ने राष्ट्रपति का अपमान किया है और भारत के संविधान की भावना का उल्लंघन किया है.

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