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CG ELECTION WATCH : अंबिकापुर विधानसभा सीट में घमासान, एक अनार सौ बीमार की स्थिति, नए चेहरे पर दांव …

CG ELECTION WATCH: Fierce in Ambikapur assembly seat, condition of one pomegranate hundred sick, bet on new face … Name final in Raipur Congress too

अंबिकापुर। अंबिकापुर विधानसभा सीट से इस बार चुनाव रोचक और कड़ा मुकाबला होने के संभावना है। उपमुख्यमंत्री टी.एस. बाबा सरगुजा संभाग के कांग्रेस के बड़े नेता हैं। अधिकार संपन्न और सक्रिय टी.एस. बाबा को घेरने के लिए भाजपा ने पहली बार गंभीरता से विचार विमर्श कर प्रत्याशी चयन करने का निर्णय लिया है। 15 साल के रमन राज में अम्बिकापुर क्षेत्र के लिए घोषित प्रत्याशी को कमजोर माना गया है। ठाकुर के खिलाफ एक ठाकुर को ही प्रत्याशी बनाने से भाजपा और कमजोर हुई। अन्य कार्यकर्ताओं में भी निराशा का महौल रहा। इस बार जुझारू और सक्रिय साफ छबि के नेता को टिकिट देने के लिए पार्टी हाईकमान से दबाव है। कांग्रेस से भाजपा में गए पार्षद आलोक दुबे को हर लिहाज से मजबूत दावेदार माना जा रहा है। तमाम सर्वे में पिछले पांच वर्षों से लगातार टी.एस. बाबा के खिलाफ लड़ाई लड़ने के कारण दिल्ली के नेताओं की नजर में आ गए हैं। इसके अलावा राजेश अग्रवाल, अनिल सिंह मेजर, अखिलेश सोनी, कमलभान सिंह सहित कई लोग टिकिट पाने जोरदार तरीके से प्रयास करने में लगे हैं।

अम्बिकापुर विधानसभा क्षेत्र को कांग्रेस के लिए उपयुक्त सीट माना जाता है। क्योंकि अल्पसंख्यक वर्ग की संख्या काफी है। इसके अलावा समाज के अलग-अलग वर्गों में टी.एस. की पकड़ अधिक होने के कारण भाजपा के प्रत्याशी चुनाव लड़ने के लिए आसानी से तैयार नहीं होते हैं। कांग्रेस की गुटीय राजनीति का असर अंम्बिकापुर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। पहली बार महल विरोधी नेताओं को तवज्जों मिल रही है। भाजपा ने अम्बिकापुर क्षेत्र में 6 से अधिक सर्वे कराकर अपनी स्थिति का आंकलन किया है। गत विधानसभा चुनाव से इस बार चुनाव में भाजपा को लाभ होने की उम्मीद दिख रही है। प्रत्याशी चयन करने में भाजपा और कांग्रेस दोनों के पसीने छूट रहे हैं। दोनों ही पार्टी में गुटबाजी उभर कर सामने आने से संगठन चिंतित है। भाजपा ने इस इलाके से अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। घोषित प्रत्याशियों का कई इलाके में अंदरूनी विरोध हो रहा है। वहीं कांग्रेस के कितने विधायकों की टिकट कटेगी? कौन नया प्रत्याशी होगा? इसको लेकर माथा-पच्ची चल रही है। टी.एस. बाबा के सर्वे में कई विधायकों के टिकट कटने की चर्चा है। वहीं भाजपा सारे बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में जुटी है।

 

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