CG HIGH COURT : 13 year old order cancelled
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के चौकीदार रामसिंह यादव को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नियमित विभागीय जांच के बिना दंड के तौर पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति नहीं दी जा सकती।
बीमारी के कारण ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का मामला
रामसिंह यादव की नियुक्ति 6 जुलाई 2002 को विश्वविद्यालय में चौकीदार के पद पर हुई थी। आरोप था कि वह ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। इस पर विश्वविद्यालय ने नोटिस जारी किया, जिसके जवाब में उन्होंने बीमारी और हृदय संबंधी परेशानी का हवाला दिया।
विश्वविद्यालय ने 10 सितंबर 2012 को 461 दिनों की अनुपस्थिति को बिना वेतन मानते हुए एक वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया था। इसके बाद 16 अप्रैल 2013 को उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। इस फैसले के खिलाफ उनका अभ्यावेदन भी 11 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया गया था।
दो महीने में बहाली की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने पाया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दंडात्मक प्रकृति का था और निर्धारित विभागीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। विश्वविद्यालय ने कर्मचारी की बार-बार अनुपस्थिति और खराब कार्यप्रदर्शन का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने इसे प्रक्रिया की अनदेखी का आधार नहीं माना।
हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति और अभ्यावेदन खारिज करने, दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। विश्वविद्यालय को रामसिंह यादव को सेवा में वापस लेने और प्रमाणित आदेश मिलने के दो महीने के भीतर काल्पनिक वेतन निर्धारण करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, उन्हें सेवा से बाहर रहने की अवधि का पिछला वेतन नहीं मिलेगा। अदालत ने इस मामले में देरी से याचिका दायर करने और पिछला वेतन मांगने के आधार पर यह राहत सीमित रखी।
