खफा है कुलदीप बिश्नोई? दिया ये बयान

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नई दिल्ली: राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग के आरोप में कांग्रेस से निकाले गए कुलदीप बिश्नोई ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की. भाजपा के दोनों सीनियर नेताओं से मुलाकात के बाद बिश्नोई ने एक ट्वीट किया, जो चर्चा में बन गया. बिश्नोई ने लिखा कि अपनी जुबान के लिए सरे-राह हो जाना, बहुत कठिन है, अमित शाह हो जाना. बिश्नोई के इस ट्वीट के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि वे भाजपा में शामिल भी हो सकते हैं. बिश्नोई ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि अमित शाह से मिलना एक वास्तविक सम्मान और खुशी की बात थी. वे एक सच्चे राजनेता हैं. मैंने उनके साथ बातचीत में उनकी आभा और करिश्मा को महसूस किया. भारत के लिए उनका दृष्टिकोण विस्मयकारी है. कुलदीप ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बारे में लिखा कि मैं जेपी नड्डा से मिलकर अति गर्वित हुआ. उनका सहज और विनम्र स्वभाव उन्हें औरों से मिलों अलग दिखाता है. उनकी सक्षम अध्यक्षता में भाजपा ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को देखा है. मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं. हरियाणा में कांग्रेस पार्टी ने अपने विधायक कुलदीप बिश्नोई को 11 जून को पार्टी से बाहर निकाल दिया था. राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने कार्तिकेय शर्मा के लिए ‘क्रॉस वोटिंग’ की थी. कार्तिकेय शर्मा को बीजेपी और उसके सहयोगी दल जेजेपी का समर्थन हासिल था. कुलदीप बिश्नोई को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. उनका बगावती तेवर कांग्रेस को ऐसा भारी पड़ा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के जाने-माने नेता अजय माकन चुनाव हार गए. कुलदीप बिश्नोई हरियाणा की राजनीति में गैर-जाट चेहरा माने जाते हैं. उन्हें सियासत विरासत में मिली है. बिश्नोई हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे हैं. 1998 में अपने पिता भजन लाल की परंपरागत सीट आदमपुर सीट से कुलदीप बिश्नोई पहली बार कांग्रेस से विधायक बने और हिसार से सांसद भी रहे. हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम बनाने के खिलाफ कुलदीप बिश्नोई अपने पिता भजनलाल के साथ 2007 में कांग्रेस छोड़कर हरियाणा जनहित कांग्रेस नाम से अपनी पार्टी बनाई थी. कुलदीप बिश्नोई ने अपनी हरियाणा जनहित कांग्रेस को नौ साल चलाया, लेकिन कोई खास राजनीतिक मुकाम हासिल नहीं कर पाए. हालांकि, एक बार उनकी पार्टी के पांच विधायक जीते थे, जिन्हें हुड्डा ने अपने साथ मिला था. दूसरी बार उनकी पार्टी के दो विधायक जीते, जिसमें खुद स्वयं और पत्नी रेणुका बिश्नोई विधायक चुनी गई थीं. इसके बाद 2016 में कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस में घर वापसी कर गए और हरियाणा जनहित कांग्रेस को उन्होंने कांग्रेस में विलय कर दिया था.

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