जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव के नोटिफिकेशन के साथ प्रक्रिया आरम्भ हो गई। ऐसे में कोर्ट द्वारा प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जाना गलत है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के दो सिमिलर आदेश निरस्त कर दिए। कोर्ट ने निर्देश दिए कि सीधी जिले की सिहौलिया ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट में जोड़े गए अनावेदकों के नाम अलग किए जाएं।
ये है मामला- सीधी जिला, ब्यौहारी तहसील की सिहौलिया ग्राम पंचायत के निवासी अम्बोज कुमार द्विवेदी की ओर से यह अपीलें दायर की गईं। अधिवक्ता सत्य प्रकाश मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि सावित्री जायसवाल व पुनीत सिंह चंदेल दूसरी ग्राम पंचायत क्षेत्र के निवासी हैं। इसके बावजूद उन्होंने यह दावा करते हुए कि वे सिहौलिया पंचायत के निवासी हैं, हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की। हाईकोर्ट के जस्टिस एसए धर्माधिकारी की सिंगल बेंच ने 8 व 9 दिसम्बर को याचिकाएं मंजूर कर सावित्री जायसवाल व पुनीत सिंह के नाम सिहौलिया पंचायत की वोटर लिस्ट में जोडऩे के निर्देश दे दिए।
अधिवक्ता मिश्रा ने सिंगल बेंच के इन्हीं दोनों एकसमान आदेशों को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि पंचायत चुनाव के लिए 4 दिसम्बर को नोटिफिकेशन जारी कर प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि एक बार प्रक्रिया आरम्भ होने के बाद चुनाव में दखलंदाजी नहीं की जा सकती। ना ही कोर्ट कोई अंतरिम आदेश पारित कर सकती है। तर्क से सहमत होकर कोर्ट ने सिंगल बेंच के उक्त दोनों आदेश निरस्त कर दिए। कोर्ट ने वोटर लिस्ट में दोनों अनावेदकों के नाम जोडऩे के लिए कलेक्टर सीधी द्वारा जारी आदेश को भी रद्द करने के निर्देश दिए।
