CHHATTISGARH : Big action on snakebite scam, preparations for EOW investigation!
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब जांच का दायरा और बढ़ने वाला है। DGP अरुण देव गौतम ने बिलासपुर में कहा कि आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए मामले को विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके बाद मामले की जांच EOW को मिलने की संभावना बढ़ गई है।
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DGP ने अब तक पुलिस की कार्रवाई को सही और निष्पक्ष बताते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने का फैसला लिया जा रहा है।
17 करोड़ के मुआवजे पर उठे सवाल
मामले में आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सामान्य मौतों को भी सर्पदंश से हुई मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा लिया गया। सरकारी नियम के तहत सर्पदंश से मौत पर 4 लाख रुपए की सहायता मिलती है।
जांच में बिलासपुर में 431 मौतों के नाम पर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा बांटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कई मामलों में मृतकों के परिजनों की जानकारी के बिना ही राशि निकाल ली गई।
17 लोग गिरफ्तार, बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकती है जांच
इस मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारी शामिल हैं। जांच में कथित ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ का भी खुलासा हुआ है, जिसमें अलग-अलग विभागों के लोगों की भूमिका सामने आने का दावा है।
जांच आगे बढ़ने के साथ तहसीलदारों और बड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। अब विशेषज्ञ एजेंसी को जांच सौंपे जाने से इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल हो सकती है।
सुशांत शुक्ला ने भी उठाई थी जांच की मांग
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में इस मामले को उठाया था और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। अब DGP के बयान के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है।
