CHHATTISGARH: The mortal remains of Chhattisgarh’s brave son, wrapped in the Tricolour, have reached his native village!
CHHATTISGARH :अम्बिकापुर के बतौली क्षेत्र के ग्राम कपाटबहरी निवासी 36 वर्षीय कमलेश केरकेट्टा, पिता निर्मल केरकेट्टा, BSF की 66वीं बटालियन में पदस्थ थे.
वर्तमान में उनकी पदस्थापना असम के डोबरी किस्तापड़ा स्थित कैंप में थी.
जानकारी के अनुसार 6 अगस्त को कमलेश रात करीब 12 बजे नाइट ड्यूटी पूरी कर कैंप लौटे थे. कैंप पहुंचने के करीब एक से दो घंटे बाद वह अचानक लापता हो गए.
कैंप से लापता होने के बाद जवान का शव दूसरे गांव में एक धुबरी के समीप मिला. 7 अगस्त को कंपनी कमांडर ने जवान की पत्नी ममता केरकेट्टा को फोन कर कमलेश के लापता होने की जानकारी दी और तलाश जारी होने की बात बताई.
घटना की जानकारी मिलने के बाद बीएसएफ अधिकारियों ने शव को गृह ग्राम लाकर मंगलवार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी.
इसी दौरान शनिवार को दोपहर करीब दो बजे कैंप से लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरे गांव में स्थित एक धुबरी के पास जवान का शव मिलने की सूचना मिली.
BSF की 66वीं बटालियन के अधिकारी 11 अगस्त को जवान का पार्थिव शरीर लेकर उनके गृह ग्राम कपाटबहरी पहुंचे. तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया. ग्रामीणों और परिचितों ने जवान के परिजनों को ढांढस बंधाया.
मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान बीएसएफ के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया. अधिकारियों ने जवान को शहीद का दर्जा भी दिया.
हालांकि कमलेश केरकेट्टा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका अब तक स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है. पत्नी द्वारा मौत का कारण पूछे जाने पर अधिकारियों ने जांच जारी होने की जानकारी दी.
