राजधानी रायपुर की करीब एक हजार हेक्टेयर जमीन पर नगर विकास योजना की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। नकटी समेत आधा दर्जन गांवों में निजी भागीदारी से योजना को आकार देने की तैयारी है। योजना के लिए एक बार टेंडर भी हो चुका है, लेकिन फाइनेंशियल बीट पहले ही खोल दिए जाने के कारण टेंडर निरस्त करना पड़ा।
अब चर्चा यह है कि जमीन के कारोबार से जुड़े कांग्रेस और भाजपा नेताओं के करीबी लोगों ने मिलकर टेंडर में अपनी दावेदारी पेश की है। बताते हैं कि एक समूह को अंतिम समय में अपना पार्टनर बदलना पड़ा। वजह यह बताई जा रही है कि पुराने पार्टनर के खिलाफ वित्तीय अपराध का मामला दर्ज था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल करीब आधा दर्जन बिल्डर और कारोबारी इस रेस में बताए जा रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि एक हजार हेक्टेयर के इस विकास में किसे भागीदारी का मौका मिलता है और किसकी बोली बाजी मारती है।
सिंहदेव के प्रयासों को झटका
युवा कांग्रेस के चुनाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता परेशान हैं। चुनाव के बहाने पार्टी के भीतर खींचतान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। हालात को भांपते हुए पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से चर्चा की है। बताया जाता है कि सिंहदेव ने प्रस्ताव रखा कि किसी एक नाम पर सहमति बना ली जाए, लेकिन बात नहीं बनी।
भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने बलौदाबाजार के शैलेन्द्र बंजारे के नाम पर अपना समर्थन दे दिया है। वहीं, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष कोको पाढ़ी ने सत्येंद्र चेलक का नाम आगे बढ़ाया था, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का समर्थन मिलने की चर्चा है। पूर्व मंत्री उमेश पटेल की सहानुभूति प्रशांत बोकाड़े के साथ बताई जा रही है।
उधर, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का आशीर्वाद भी शैलेन्द्र बंजारे को मिलने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सिंहदेव की पार्टी नेताओं के बीच आमसहमति बनाने की कोशिश फिलहाल नाकाम होती नजर आ रही है। अब देखना है कि युवा कांग्रेस का चुनाव पार्टी के भीतर की खींचतान को कितना बढ़ाता है।
पार्षदों से नाराजगी
रायपुर नगर निगम में भाजपा के 63 पार्षद हैं। अब ये पार्षद अपनी पार्टी के जी का जंजाल बन गए हैं। ऐसी चर्चा है कि पार्षदों की कमीशनखोरी की वजह से राजधानी की सफाई व्यवस्था बदतर हो गई। इन शिकायतों के चलते सरकार को नगर निगमों के लिए सफाई व्यवस्था की प्लानिंग बदलनी पड़ी।
चारों विधानसभा क्षेत्र के लिए सफाई के अलग-अलग ठेके होंगे। हालांकि पार्षदों ने इसका विरोध किया। मगर निगम के एक अफसर ने कह दिया कि साढ़े 4 हजार कर्मचारी सफाई में लगे होने की बात कही गई है, लेकिन इतनी संख्या में सफाई व्यवस्था में जुट जाएं, तो शहर में एक कंकड़ नहीं दिखेगा। सफाई के ठेके में कर्मचारियों के वेतन डकारने का आरोप लगा है। नई व्यवस्था में सुधार आता है या नहीं, देखना है।
भाजपा के नए प्रभारी को लेकर हलचल, मंगल पांडे का नाम चर्चा में
छत्तीसगढ़ भाजपा के नए प्रभारी को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। संगठन में संभावित बदलाव को लेकर कई नामों पर विचार की अटकलें हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी इस बार भी बिहार से किसी वरिष्ठ नेता को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
इसी क्रम में बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडे का नाम भी चर्चा में सामने आया है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। ऐसे में फिलहाल इसे संगठन के भीतर चल रही संभावित नामों की चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए पार्टी प्रभारी के स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है। नए प्रभारी के सामने प्रदेश संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ पार्टी की गतिविधियों को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र निपटने के बाद भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी के नाम का ऐलान हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो नए प्रभारी की नियुक्ति के साथ प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक स्तर पर भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल भाजपा के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि पार्टी छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी किस नेता को सौंपती है। मंगल पांडे का नाम सामने आने से राजनीतिक गलियारों में इस संभावित नियुक्ति को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
सौर ऊर्जा के नाम पर बड़ा खेला
बिजली के संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के नाम पर राहत देने की योजनाएं बनी हुई है। बिजली बिल से परेशान लोग सौर ऊर्जा को विकल्प के रूप में मानते हुए दौड़ रहे हैं। बढ़ती मांग के कारण बाजार में बूम आ गए हैं। ऐसे में बड़े उद्योगपति और व्यापारी कुछ अधिकारियों और नेताओं से मिलकर फायदे वाला मनचाहा ेएक आर्डर निकलवा लिया है। इस आर्डर से बड़े-बड़े लोगों को बड़ा फायदा और जनता की जेब और खाली होगी।
इस आदेश के अचानक निकलने की पटकथा में कई खोखे का काम हो गया है। अब बेचारी जनता बिजली के संकट से ऊबरने की कोशिश में एक और झटका लग रहा है। सौर ऊर्जा भारी महंगा और कम किफायती हो रही है।
वही इसका दूसरा पहलू यह भी चर्चा खूब हो रही है, कई उपभोक्ता बिजली बिल का व्यापक रूप से विरोध देखने को भी मिल रहा है। विरोध को देखते हुए सरकार भी सकते आ गई है।
उद्योगपति बोरिया-बिस्तर उठाने की तैयारी में
देश के एक बड़े उद्योगपति के खिलाफ कार्यवाही के बाद उद्योग जगत में नाराजगी है,छग में एक उद्योगपति के बढ़ते प्रभाव से अन्य उद्योगपति चिंतित हैं,परंतु सरकार के डर में गोलबंद होने से बच रहे हैं। एक बड़े उद्योगपति में तो हाल में हुई घटना के बाद व्यथित होकर अपने आगामी कार्ययोजना को शिथिल कर दिया है, उस इकाई के बोरिया बिस्तर बंधने वाली है।
उद्योगपति में नया उद्योग लगाने की रूचि कम कर दी है,जबकि इस उद्योगपति का हजारों करोड़ प्रदेश में लगा हुआ है। इस उद्योगपति के पीछे कौन अधिकारी हैं, कौन नेता है, किसकी षंडय़ंत्र है। एक तरफ सरकार उद्योग निवेश की मुहिम चला रही है, दूसरी तरफ एक बड़ा उद्योगपति के हाथ खींचने की खबर से सवाल उठ रहे हैं।
