PASSPORT CITIZENSHIP PROOF : If passport is not proof of citizenship, then what is?
नई दिल्ली। एक बयान ने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। बस फिर क्या था, विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
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कांग्रेस से लेकर शिवसेना (यूबीटी) और निर्दलीय सांसदों तक ने सवाल उठा दिया कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता साबित नहीं करता, तो आम आदमी आखिर किस दस्तावेज के भरोसे अपनी भारतीय पहचान साबित करेगा?
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पूछा कि जब आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड और अब पासपोर्ट भी अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो नागरिकों के पास बचता क्या है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन आखिर क्यों कराया जाता है।
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आदित्य ठाकरे और कपिल सिब्बल ने भी सरकार से जवाब मांगा। वहीं लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि क्या सरकार बिना यह सुनिश्चित किए कि कोई व्यक्ति भारतीय है, उसे पासपोर्ट जारी कर देती है?
सरकार की तरफ से जवाब भी उतनी ही तेजी से आया। सरकारी सूत्रों ने कहा कि इसमें नया कुछ नहीं है। कानूनी रूप से पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं रहा। नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनों और प्रक्रियाओं के तहत होता है, जबकि पासपोर्ट का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है।
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सरकार ने यह भी याद दिलाया कि पासपोर्ट कानून 1967 और अदालतों के कई फैसलों में पहले से स्पष्ट किया जा चुका है कि पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता।
अब इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है और बड़ा सवाल वही है, अगर पासपोर्ट नहीं, तो नागरिकता का अंतिम प्रमाण आखिर क्या है?
