Chai Pe Charcha: Stirrings in the Delhi Durbar—is a major political reshuffle in the offing in Chhattisgarh?
पत्रकार दीपक तिवारी
छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में है। राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या मंत्रिमंडल विस्तार की पटकथा लिखी जा रही है या फिर संगठन में बड़ा बदलाव होने वाला है?
चर्चा है कि आज सुबह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव दिल्ली पहुंचे और वहां पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की। वहीं एक दिन पहले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी दिल्ली में मौजूद रहे। इन लगातार हो रही मुलाकातों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin का पंजाब कार्यक्रम छोड़कर तत्काल नई दिल्ली लौटना आखिर किस संकेत की ओर इशारा करता है। राजनीतिक जानकार इसे सामान्य बैठक मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि जब शीर्ष नेतृत्व एक के बाद एक प्रदेश के बड़े नेताओं से मुलाकात करे तो उसके पीछे कोई न कोई बड़ा राजनीतिक संदेश अवश्य होता है।
इधर मीडिया और सत्ता के गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी मंत्रिमंडल विस्तार की जमीन तैयार की जा रही है। कहा जा रहा है कि यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो आधा दर्जन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। चर्चा यह भी है कि इनमें तीन महिलाओं को अवसर देकर भाजपा महिला नेतृत्व को बड़ा संदेश दे सकती है, जबकि तीन अन्य नए चेहरे क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने के लिए शामिल किए जा सकते हैं।
राजधानी के राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा तैर रही है। कुछ नेताओं की नजर मंत्री पद पर है तो कुछ की चिंता अपनी कुर्सी बचाने को लेकर बताई जा रही है। कोई संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है तो कोई प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की संभावनाओं का गणित लगा रहा है। कई नेताओं के समर्थक तो अभी से अपने-अपने नेता को मंत्री बनाने की मुहिम में जुट गए हैं।
हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन दिल्ली में बढ़ी गतिविधियों ने इतना जरूर तय कर दिया है कि कुछ न कुछ पक रहा है। अब यह राजनीतिक खिचड़ी मंत्रिमंडल विस्तार के रूप में सामने आएगी, संगठनात्मक बदलाव के रूप में या फिर दोनों का मिश्रण होगी, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है।
फिलहाल चाय की चुस्कियों के साथ चर्चा यही है कि दिल्ली में बैठकों का दौर यूं ही नहीं चल रहा। सत्ता और संगठन के शतरंज पर कोई बड़ी चाल चलने की तैयारी जरूर दिखाई दे रही है।
