KERALA ELECTION RESULT : What happened to CPM that its 10-year rule was overturned?
केरल। केरल की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा झटका वामपंथी खेमे को लगा है। कभी 99 सीटों के दम पर सरकार चलाने वाली CPM अब सिर्फ 26 सीटों पर सिमट गई। यह सिर्फ चुनावी हार नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व और काम करने के तरीके पर जनता का सीधा संदेश माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनता सरकार की योजनाओं से उतनी नाराज नहीं थी, जितनी नेतृत्व की शैली से। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर सत्ता केंद्रीकृत करने, आलोचना बर्दाश्त न करने और पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक माहौल कमजोर करने जैसे आरोप लगातार लगते रहे। यही नाराजगी धीरे-धीरे वोट में बदल गई।
हार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार के 21 में से 13 मंत्री चुनाव हार गए। कई पुराने CPM नेताओं ने पार्टी छोड़कर बगावत की और कुछ ने कांग्रेस के समर्थन से चुनाव जीत भी लिया। दूसरी तरफ कांग्रेस नेतृत्व वाला UDF 102 सीटों के साथ जबरदस्त वापसी करने में सफल रहा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह एंटी-लेफ्ट वोट नहीं, बल्कि एंटी-लीडरशिप वोट है। यानी जनता ने विचारधारा नहीं, नेतृत्व के तौर-तरीकों को निशाना बनाया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है… क्या CPM केरल में खुद को फिर से खड़ा कर पाएगी?

