Breaking News: “The Stamp Duty Racket—Recovery of Lakhs; Now the System is Entangled, and the Common Man is in Distress.”
पत्रकार दीपक तिवारी
Breaking News: राजधानी रायपुर में जमीन रजिस्ट्री से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की जमीन के पट्टे की रजिस्ट्री से जुड़ा है, जहां एक आम नागरिक से लाखों रुपये की अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी वसूल ली गई।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, एक व्यक्ति ने RDA की जमीन का पट्टा लिया और रजिस्ट्री कराने के लिए उप पंजीयन कार्यालय पहुंचा। वहां मौजूद उप-पंजीयक (Sub-Registrar) ने नियमों की सही जानकारी के अभाव में स्टांप ड्यूटी का गलत आकलन कर दिया।
बताया गया कि:
वास्तविक स्टांप ड्यूटी कम बनती थी
लेकिन अधिकारी ने करीब ₹8,50,000 की ड्यूटी बताई
आवेदक ने मजबूरी में राशि जमा कर रजिस्ट्री भी करा ली
गलती का खुलासा, लेकिन पैसा फंसा
कुछ दिन बाद जब संबंधित व्यक्ति ने नियमों की जानकारी ली, तो उसे पता चला कि
स्टांप ड्यूटी का कैलकुलेशन पूरी तरह गलत था
उसे हजारों नहीं, लाखों का नुकसान हुआ
इस पर उसने शिकायत दर्ज कराई:
जिला पंजीयन कार्यालय में
और पंजीयन महानिरीक्षक कार्यालय (IG Registration) में
जांच में यह बात सामने आई कि वास्तव में ड्यूटी की गणना गलत की गई थी।
नियम क्या कहते हैं?
भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 और पंजीयन नियमों के अनुसार:
एक बार स्टांप ड्यूटी जमा होने और दस्तावेज पंजीकृत हो जाने के बाद
राशि वापस करना बेहद कठिन होता है
रिफंड केवल विशेष परिस्थितियों में ही संभव होता है
वह भी सीमित समय और सख्त प्रक्रिया के तहत
अब फंसा प्रशासन
मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है:
जिला रजिस्ट्रार खुद दुविधा में फंसे हुए हैं
शिकायतकर्ता को मौखिक आश्वासन दिया जा रहा है – “पैसा वापस होगा”
लेकिन नियम इसके उलट खड़े हैं
यानी: “वसूली हो गई, लेकिन वापसी का रास्ता बंद!”
सबसे बड़ा सवाल
जब अधिकारी को नियम की जानकारी नहीं थी, तो जिम्मेदारी किसकी?
क्या आम जनता को सिस्टम की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ेगा?
क्या ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
जनता में आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर रायपुर में लोगों के बीच भारी नाराजगी है। चाय ठेलों से लेकर दफ्तरों तक एक ही चर्चा:“सरकारी गलती, और नुकसान आम आदमी का!
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो ऐसे कई और लोग लाखों की ठगी का शिकार हो सकते हैं।
(सम्पादकीय टिप्पणी)
“पंजीयन विभाग को चाहिए कि वह नियमों की स्पष्ट जानकारी दे, अधिकारियों को प्रशिक्षित करे और आम जनता के लिए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करे, वरना ‘रजिस्ट्री’ अब ‘रिस्क’ बनती जा रही है।

