KABIRDHAM PDS SCAM : Cash payment instead of ration, a big question on the system
कवर्धा। कबीरधाम जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पूरी तरह से पटरी से उतरती नजर आ रही है। गरीबों को राहत देने के लिए बनाई गई सरकारी योजना अब भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की शिकार हो चुकी है। जिले की अधिकांश राशन दुकानों में न तो समय पर राशन मिल रहा है और न ही उसकी गुणवत्ता पर कोई ध्यान दिया जा रहा है।
राशन दुकानों में बांटा जा रहा चावल खाने लायक नहीं बताया जा रहा है। चावल में कंकड़, धूल और टूटा हुआ अनाज साफ नजर आ रहा है। वहीं शक्कर की गुणवत्ता भी बेहद घटिया है। कई हितग्राहियों का कहना है कि ऐसा राशन पशुओं को खिलाने लायक भी नहीं है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई राशन दुकान संचालक अनाज देने के बजाय हितग्राहियों को 19–20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से नकद पैसा थमा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब पैसा दिया जा रहा है, तो सरकारी चावल आखिर जा कहां रहा है? चर्चा है कि यही चावल खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में जिला खाद्य अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि खाद्य विभाग के संरक्षण में ही यह पूरा खेल चल रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो निरीक्षण हो रहा है और न ही किसी पर कार्रवाई।
कागजों में दिखाया जा रहा है कि राशन का वितरण पूरी तरह सही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। कई वार्डों और ग्रामीण इलाकों में हितग्राही महीनों से राशन के लिए भटक रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी से जनता में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
अब सवाल साफ हैं गरीबों के हक का राशन कौन डकार रहा है? जिला खाद्य अधिकारी और विभागीय अमला कब जागेगा? क्या मुख्यमंत्री और खाद्य मंत्री इस भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेंगे?
कबीरधाम की जनता जवाब चाहती है। कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला सड़क से सदन तक गूंज सकता है।

