ये क्या हुआ … ADG कोर्ट ने प्रभारी एसपी को लिया हिरासत में, फिर मची खलबली, जानिए पूरा मामला

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What happened… The ADG court took the in-charge SP into custody, then there was chaos, know the whole case.

बिहार। हत्या के 43 साल पुराने मामले में आदेश के बाद भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं करने अथवा अदालत द्वारा जारी कुर्की-जब्ती का तामिला प्रतिवेदन पेश नहीं करने के मामले में एसपी आशीष भारती के अवकाश पर रहने के कारण प्रभारी एसपी सह मुख्यालय डीएसपी सरोज कुमार साह अदालत में पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें पांच घंटे तक न्यायिक हिरासत में रखा।

बाद में उनके द्वारा एसपी को पेशी कराने के दिए गए आवेदन पर कोर्ट ने विचार किया व शाम तीन बजे उन्हें बाहर जाने की अनुमति दी। साथ ही एसपी को 24 अक्टूबर को हर-हाल में अदालत में पेश होने का आदेश दिया। इस दौरान कई पुलिस अधिकारी व अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता आते-जाते रहे। कुछ लोगों ने मामले में कोर्ट से गुहार भी लगायी। लेकिन, कोर्ट का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश पर मामले को तीन माह के अंदर हर हाल में निष्पादित किया जाना है।

बताया जाता है कि कोर्ट ने हत्या के एक मामले में नासरीगंज के अतमिगंज निवासी लक्ष्मीनारायण मास्टर के विरूद्ध पूर्व में वारंट व कुर्की-जब्ती का आदेश दिया था। आदेश का अनुपालन कराने के लिए कोर्ट ने कई बार पत्र भेजा। एसपी को रिमांइडर भी जारी किया था। लेकिन, मामले के आरोपित को न तो गिरफ्तार कर पेश किया गया और न ही कुर्की-जब्ती का तामिला प्रतिवेदन पेश किया गया।

इस पर कोर्ट ने एसपी को 20 जून को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जवाब नहीं देने पर कोर्ट ने 22 जुलाई को पत्र जारी कर एसपी को तीन अगस्त को सदेह उपस्थित होकर कारण बताने को कहा था। बताया जाता है कि हाईकोर्ट ने सात अप्रैल को मामले को हर हाल में तीन माह के भीतर निष्पादित करने का आदेश निचली अदालत को दिया था। इसके बाद कोर्ट ने कार्रवाई की है। कोर्ट ने पूर्व में तामिला प्रतिवेदन नहीं देने पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। गौरतलब हो कि मामले का ट्रायल 42 साल से चल रहा है।

क्या है पूरा मामला –

नसारीगंज थाना क्षेत्र के अतमीगंज गांव में रामानुज सिंह उर्फ ​​छेदी सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गयी।  18 सितंबर 1979 को छह आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था (नसारीगंज थाना मामला संख्या 06/1979)। सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मौत हो गई। मामले की सुनवाई (ट्रायल नंबर 115/1980) दो आरोपी व्यक्तियों राम निवास सिंह और लक्ष्मी नारायण मास्टर की उपस्थिति के लिए अदालत में लंबित है। मामले की निगरानी उच्च न्यायालय पटना द्वारा की जा रही थी और उच्च न्यायालय ने इस साल 7 अप्रैल को सत्र अदालत से तीन महीने के भीतर मुकदमे को समाप्त करने को कहा था। प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) सासाराम मनोज कुमार की निचली अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। लेकिन पुलिस ऐसा करने में नाकाम रही।

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