SUCHITA YOJANA CG : Questions on Suchita Yojana, work of supplying sanitary pads to furniture firm…
रायपुर। छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग की सुचिता योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। योजना के तहत सैनेटरी पैड की सप्लाई का काम किसी मेडिकल या सैनेटरी उत्पाद निर्माता को नहीं, बल्कि कोरिया की एक फर्नीचर फर्म को सौंपे जाने का मामला सामने आया है।
दस्तावेजों के मुताबिक यह पूरा काम GeM पोर्टल के जरिए नहीं किया गया और न ही कोई नई ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बजाय ऑफलाइन आदेश जारी कर सीधे सप्लाई की जिम्मेदारी दे दी गई, जबकि भंडार क्रय नियम 2022 और संशोधित नियम 2025 के तहत शासकीय खरीदी GeM पोर्टल से करना अनिवार्य है।
महिला एवं बाल विकास विभाग, नवा रायपुर द्वारा जारी आदेश में 350 स्कूलों और कॉलेजों के लिए 35 लाख सैनेटरी पैड की खरीदी का जिक्र है। प्रति पैड की दर 3.25 रुपये तय की गई है, जिससे कुल खर्च करीब 1 करोड़ 13 लाख 75 हजार रुपये बैठता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस फर्म को यह काम दिया गया, उसका मुख्य व्यवसाय फर्नीचर निर्माण से जुड़ा है। आदेश में न तो कंपनी के सैनेटरी उत्पाद से जुड़े अनुभव का उल्लेख है और न ही किसी तकनीकी योग्यता का।
जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि की खरीदी बिना खुली और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के करना नियमों के खिलाफ है। विभाग का दावा है कि जनवरी-फरवरी 2025 में GeM पोर्टल पर टेंडर निकाले गए थे और एल-1 कंपनी के काम न करने के बाद फर्नीचर फर्म को चुना गया, लेकिन इस पूरे फैसले के लिए अलग वित्तीय अनुमति लिए जाने के कोई ठोस दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।
जब इस पूरे मामले पर विभाग के संचालक से सवाल किए गए तो स्पष्ट जवाब नहीं मिला। नियमों के मुताबिक 90 दिन बाद टेंडर स्वतः निरस्त हो जाता है और ऐसे में नई प्रक्रिया या वित्तीय सहमति जरूरी होती है। बावजूद इसके ऑफलाइन तरीके से काम सौंपा जाना कई संदेह खड़े करता है।
सरकार की मंशा छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर अच्छी हो सकती है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर की गई खरीदी पूरी योजना की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा रही है।
