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किसानों के हक पर डाका! 3 करोड़ से ज्यादा का 890 टन यूरिया गायब, मचा हड़कंप

भोपाल : मध्य प्रदेश में एक तरफ सरकार किसान को समर्थ बनने में जुटी हुई है, तो वहीं दूसरे तरफ सरकार के ही नुमाइंदे किसानों के हक पर डाका डालने का काम कर रहे हैं. ऐसा ही एक मामला जबलपुर जिले से सामने आया है, जहां किसानों के लिए आया सैकड़ों टन यूरिया गायब हो गया. सहकारी समितियों में जाने वाला यूरिया कहां गया, किसी को नही मालूम. अब अधिकारी इस मामले में जांच की बात कर रहे हैं. 25 अगस्त को ट्रेन के जरिए करीब 2 हजार 666 मेट्रिक टन यूरिया जबलपुर आया था.

नियमों के मुताबिक, इसका 70 फीसदी हिस्सा यानी करीब 1 हजार 852 मेट्रिक टन यूरिया मंडला, डिंडोरी, सिवनी और दमोह भेजा जाना था, लेकिन तय की गई मात्रा के बदले महज 10 से 25 प्रतिशत की यूरिया इस जिलों में पहुंचा. बाकी कहां चला गया, अब तक किसी को जानकारी नही हैं, जो यूरिया गायब है, उसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपए आंकी जा रही है. कृषि विभाग के अधिकारी इस मामले पर जांच की बात कर रहे हैं. उनके मुताबिक चारों जिलों के लिए अलग-अलग जांच कमेटियां बना दी गई हैं, जिनकी जल्द ही रिपोर्ट सामने आ जाएगी.

किसानों को महंगे दाम पर खरीदना पड़ेगा यूरिया
आशंका जताई जा रही है कि यूरिया सहकारी समितियों में ना जाकर खुले बाजार में सप्लाई कर दिया गया है. अब मजबूरन किसानों को महंगे दाम पर यूरिया खरीदना पड़ेगा. वहीं पूरे मामले में किसान कल्याण एवं कृषि संयुक्त संचालक के एस नेताम का कहना है कि सभी चारो, मंडला, दमोह, डिंडोरी, सिवनी जिलों के लिए अलग-अलग जांच टीम का गठन कर दिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर करोड़ों का यूरिया कहां चला गया.

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया तीन करोड़ का यूरिया
आंकड़ो पर गौर करें तो 25 अगस्त को रेक के जरिए जबलपुर में 2 हजार 6 सौ 67 मेट्रिक टन यूरिया पहुंचा. नियम के तहत सप्लायर को 70 फ़ीसदी स्टॉक सरकारी आपूर्ति के लिए देना होता है, जिसके चलते 1853 मेट्रिक टन यूरिया 4 दिनों के लिए आवंटित हुआ. इस यूरिया को कृषि विभाग द्वारा अलग-अलग जिलों में खपत के माध्यम से अनुपात में बांटते हुए उसका अलॉटमेंट भी जारी हो गया, लेकिन जिन भी जिलों में यूरिया पहुंचा उसका आंकड़ा 10 से 25 प्रतिशत ही रहा. यानी एक हजार मैट्रिक टन से ज्यादा यूरिया फिलहाल गायब है या यूं कहें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है.

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