RAIPUR NEWS: Recitation of Bhagavad Gita to prisoners in Raipur Central Jail, changing their thinking and direction.
रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में बंदियों के मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए पिछले एक साल से गीता संस्थान और जेल प्रशासन के सहयोग से ऑनलाइन भगवद् गीता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। यह पहल उन बंदियों के लिए है, जो हत्या, दुष्कर्म और चोरी जैसे अपराधों के लिए सजा काट रहे हैं। इन बंदियों के जीवन में भगवद् गीता का अध्ययन सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
जेल के बंदियों में से कुछ अब भगवद् गीता के श्लोकों को कंठस्थ करने में माहिर हो चुके हैं और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। बंदी वासुदेव चौहान ने बताया कि वह पहले जेल में उदास रहते थे, लेकिन जब से गीता का अध्ययन शुरू किया है, उनका मन शांत और सकारात्मक हुआ है। अब तक उन्होंने 12 श्लोक कंठस्थ कर लिए हैं।
बंदी देवतादीन यादव ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि गीता के अध्ययन से उन्हें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान मिला, बल्कि जीवन के उद्देश्य और कर्मों की महत्ता भी समझ में आई। वह कहते हैं, “जेल से रिहा होने के बाद भी हम गीता का पाठ करते रहेंगे और अपने परिवार को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।”
सेंट्रल जेल के अधीक्षक अमित शांडिल्य ने कहा कि इस पहल से युवाओं में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। 23 बंदी इस ऑनलाइन गीता पाठ में भाग ले रहे हैं, जिनमें से दो बंदी तो बिना देखे ही चार से पांच पाठ कर लेते हैं। यह पहल न केवल बंदियों के जीवन को बेहतर बना रही है, बल्कि जेल से रिहा होने के बाद वे समाज में सकारात्मक योगदान देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
इस पहल को लेकर जेल प्रशासन का मानना है कि यह उन लोगों के लिए एक नजीर है, जो मानते हैं कि जेल में जाकर केवल बुराईयों को ही अपनाया जाता है। अब यह बंदी गीता के ज्ञान से न केवल अपने कर्मों को सुधार रहे हैं, बल्कि समाज में भी अच्छे कार्यों की मिसाल कायम करने की ओर बढ़ रहे हैं।
