पुरस्कार वितरण समारोह : आत्म निर्भर भारत के परिप्रेक्ष्य में मुद्दे, चुनातियां और उपलब्ध अवसरों पर विस्तृत मंथन

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Detailed brainstorming on issues, challenges and available opportunities in the context of self-reliant India

रायपुर। 19 और 20 अप्रैल को आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह, नई दिल्ली के रॉयल प्लाजा हॉटल में आयोजित किया गया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत सरकार व विभिन्न राज्य सरकारों के नीति निर्धारक एवं महत्वपूर्ण अधिकारियों को एक साझा मंच प्रदान किया जाना था, ताकि आत्म निर्भर भारत के परिप्रेक्ष्य में मुद्दे, चुनातियां एवं उपलब्ध अवसरों के ऊपर विस्तृत मंथन और चर्चा हो सकें।

कांफ्रेंस में कोविड के फलस्वरूप पड़ने वाले प्रभाव को मद्देनजर रखते हुए देश की अर्थव्यवस्था की दृढ़ता तथा भारत को एक स्व-निर्भर अंतर्राष्ट्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए उपलब्ध विभागीय अवसरों को पहचान किया जाना है। इस सम्मेलन के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेश, स्मार्ट सिटी, नगरीय विकास, हाऊसिंग, लघु एवं मध्यम उद्योग, परिवहन, रेल्वे, जल एवं स्वच्छता, शिक्षा एवं कौशल विकास आदि सेक्टरों पर विशेष फोकस डाला गया।

ज्ञात है कि माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ तथा वनमंत्री के पथ प्रदर्शन में पिछले वर्षों से छ.ग. राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा ग्रामीणों के लिए खासकर आदिवासियों महिलाओं के
आजीविका तथा उद्यमिता के विकास के लिए नये प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप कोरोना काल में भी ग्रामीणों को आजीविका का कभी संकट नहीं हुआ। छत्तीसगढ़
राज्य लघु वनोपज संघ, लघु वनोपज के संग्रहण विकास तथा व्यापार के क्षेत्र में पूर्व में भी राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पुरस्कार प्राप्त करता आया हैं।

छ.ग. राज्य लघु वनोपज को लघु वनोपज संग्रहण, प्रबंधन और व्यापार के माध्यम से आदिवासियों के लिए सतत् आजीविका प्रदान करने के लिए विभिन्न नवाचार किए गए। इन नवाचारों के लिए “इलेट्स नवाचार पुरस्कार” शासन व पब्लिक सेक्टर कैटेगरी में उक्त सम्मेलन में दिया गया। राज्य शासन छ.ग. तथा छ.ग. राज्य लघु वनोपज संघ छत्तीसगढ़ की ओर से यह पुरस्कार लघु वनोपज संघ के कार्यकारी संचालक अमरनाथ प्रसाद द्वारा प्राप्त किया गया।

छ.ग. राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा 13 लाख से भी ज्यादा छ.ग. के आदिवासी परिवारों को आजीविका संबंधी समर्थन के लिए लघु वनोपज के संग्रहण, भंडारीकरण, प्रसंस्करण व विपणन के क्षेत्र में कांतिकारी नवाचार किए गए हैं, जिनसे समाज के अभी तक उपेक्षित वर्ग को भी आजीविका तथा उद्यमिता का अवसर मिल सके। कोविड काल में बोनस, बीमा आदि का वितरण ग्रामीणों के लिए अनवरत् जारी रखा जाकर कोविड के आर्थिक दुष्प्रभाव को ग्रामीण क्षेत्रों में महसूस होने नहीं दिया गया।

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