CG KABAD MAFIA : Railway track theft, why is the police silent?
कोरबा, 28 जनवरी 2026। कोरबा जिले में एक बार फिर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कबाड़ माफिया इस कदर बेखौफ हो चुके हैं कि अब वे पुलिस को खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला गेवरा–पेंड्रा रेल परियोजना से जुड़ा है, जहां बीते 10 दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों से करीब 2 करोड़ रुपये के रेलवे ट्रैक काटकर चोरी कर लिए गए।
रेल परियोजना का काम कर रही ठेका कंपनी ने आरोप लगाया है कि तमाम सुरक्षा इंतजामों के बावजूद कबाड़ चोर न सिर्फ निर्माणाधीन रेलवे लाइन की चोरी कर रहे हैं, बल्कि सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को धमकाकर दहशत फैला रहे हैं। मौके पर खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला बांकीमोंगरा और कटघोरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। रेलवे द्वारा गेवरा–पेंड्रा रेल लाइन परियोजना के तहत करीब 135 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। ठेका कंपनी के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बांकीमोंगरा से कटघोरा के बीच निर्माणाधीन रेल ट्रैक को अलग-अलग सुनसान इलाकों में काटा गया है। जांच में सामने आया है कि रेल पटरी के साथ-साथ ट्रैक से जुड़े कई कीमती सामान भी चोरी हुए हैं।
प्रोजेक्ट मैनेजर का आरोप है कि चोरी के दौरान कबाड़ चोरों ने सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और हाइड्रा मशीन समेत अन्य वाहनों में तोड़फोड़ कर दहशत फैलाने की कोशिश की। इन हालातों से भयभीत ठेका कंपनी ने ऐसे असुरक्षित माहौल में काम जारी रखने में असमर्थता जताते हुए काम बंद करने की चेतावनी दी है।
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यदि समय रहते कबाड़ माफियाओं पर कार्रवाई नहीं हुई, तो न केवल यह महत्वपूर्ण रेल परियोजना तय समयसीमा से पिछड़ जाएगी, बल्कि आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में कबाड़ माफिया खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। जिले में बीते डेढ़ साल तक अवैध गतिविधियों पर लगाम लगी हुई थी, लेकिन पिछले 6–8 महीनों में कबाड़ और डीजल माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। रेलवे जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली व्यवस्था भी इनके निशाने पर है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करती है या फिर पुल चोरी जैसे मामलों की तरह इस केस के मास्टरमाइंड भी कानून की पकड़ से बाहर ही रह जाते हैं।

